आजादी के 77 साल बाद नक्सल इलाके में पहली बार पहुंची बस, गांव वालों की आंखें भर आईं

 आजादी के 77 साल बाद नक्सल इलाके में पहली बार पहुंची बस, गांव वालों की आंखें भर आईं

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार

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गढ़चिरौली जिले के एक आदिवासी गांव कटेझारी में अब सार्वजनिक परिवहन की सुविधा होगी क्योंकि हाल ही में सरकारी बस गांव में पहुंच गई है.

 

गढ़चिरौली के कटेझारी गांव में पहली बार पहुंची बस.

बस सेवा से स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों में सुधार.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम.

गढ़चिरौली. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आदिवासी गांव कटेझारी में अब सरकारी बस सेवा शुरू होगी. जिससे स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुंच में सुधार होगा. स्थानीय निवासी और अधिकारी इसे एक ऐतिहासिक घटना बता रहे हैं. आजादी के बाद पहली बार अब जाकर एक यात्री बस महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एक सुदूर नक्सल प्रभावित गांव में पहुंची. इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आर्थिक अवसरों और समग्र विकास तक पहुंच में सुधार करना है.

 

आजादी के 77 साल बाद नक्सल इलाके में पहुंची बस, गांव वालों की आंखें भर आईं

इंटरनेट यूजर्स ने इसे अलग-थलग और दुर्गम गांव के लिए एक मील का पत्थर बताया और इस क्षेत्र से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने और इसे मुख्यधारा में लाने के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की. कई लोगों ने गांव में बस के प्रवेश के वीडियो साझा किए और स्थानीय निवासियों ने इसे ‘केवल एक सुविधा से अधिक’ बताया. गांव के निवासियों ने बस के आगमन पर खुशी मनाई और कहा कि 1947 के बाद यह पहली बार है कि उनका गांव सार्वजनिक परिवहन से जुड़ा है.

 

 

द हिंदू द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि नई बस सेवा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि यह सेवा अवसरों का प्रवेश द्वार है. उप-विभागीय पुलिस अधिकारी जगदीश पांडे ने द हिंदू को बताया कि ‘यह सिर्फ एक बस नहीं है, बल्कि इस गांव के लोगों के साथ-साथ आसपास के 10 गांवों के निवासियों के लिए विकास का साधन है, जो इससे शिक्षा और रोजगार का लाभ उठा सकते हैं.’

 

 

कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर माओवाद विरोधी अभियान की सफलता को साझा करने के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी. उन्होंने कहा था कि सुरक्षा बलों की सफलता दर्शाती है कि नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने की दिशा में अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.