जाको राखे साइयां मार सके ना कोई भोपाल में चौथी मंजिल से गिरा चार साल का मासूम, स्कूल बैग ने ऐसे बचा ली जान
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने सभी जांच करने के बाद उसे स्वस्थ बताया।
पीठ पर टंगा था स्कूल बैग, बालकनी से झांकते वक्त संतुलन बिगड़ने से गिरा।
40 फीट ऊंचाई से गिरने के बावजूद बच्चे को किसी तरह की चोट नहीं लगी।
बच्चे की मां वल्लभ भवन में कर्मचारी है, पिता छिंदवाड़ा में नौकरी करते हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चार साल के एक बच्चे की जान उसके स्कूल बैग ने बचा ली। चौथी मंजिल की बालकनी से झांकने के दौरान वह सीधे जमीन पर आ गिरा, लेकिन उसे कुछ नहीं हुआ।

इसे आश्चर्य ही कहा जाएगा कि करीब 40 फीट की ऊंचाई से गिरते वक्त उसका बैग पहले जमीन पर गिरा और उसके ऊपर बच्चा। बैग की वजह से इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसकी जान बच गई।

सरस्वती नगर के ईडब्ल्यूएस में क्रांति भारती अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं। क्रांति वल्लभ भवन में ग्रेड तीन कर्मचारी हैं, जबकि उनके पति छिंदवाड़ा में काम करते हैं। नौकरी के चलते क्रांति के दोनों बच्चे दिन में स्कूल से आने के बाद कुछ देर घर में अकेले होते हैं। बड़ी बेटी कुहू दोपहर दो बजे स्कूल से घर आती है, जबकि बेटा सूर्यांश एक बजे घर आ जाता है।


झांकते वक्त नीचे गिरा
एक से दो बजे के बीच बालक घर में अकेला रहता है। इसी दौरान में शुक्रवार को सूर्यांश एक बजे स्कूल से अपने घर पहुंचा, लेकिन वह कमरे में जाने के बजाय बालकानी की ओर चला गया। बालकनी की रैलिंग ऊंची होने के चलते सूर्यांश कुर्सी लगाकर नीचे झांकने लगा। नीचे झांकते समय संतुलन बिगड़ने से वह चौथी मंजिल से नीचे सड़क पर गिर गया। किसी के गिरने की आवास सुन पड़ोसी बाहर निकलकर आए तो देखा कि बालक सकुशल है।

जिसने भी सुना, रह गया हैरान
पड़ोसियों ने तुरंत क्रांति को फोन कर सूचना दी। क्रांति ने घर पहुंचकर सूर्यांश को अस्पताल पहुंचाया, ताकि पता चल सके कि कहीं उसे अंदरूनी चोट तो नहीं है। दोपहर में प्राथमिक परीक्षण के बाद क्रांति बच्चे को लेकर घर आ गई, लेकिन शाम तक जैसे-जैसे रिश्तेदारों को इसकी जानकारी लगी, वे उसे देखने पहुंचने लगे। बच्चे को देखकर कई लोग तो मानने को तैयार नहीं थे कि वह इतनी ऊंचाई से गिरा और चोट नहीं लगी।

बच्चा स्वस्थ है
स्वजन शाम को सूर्यांश को लेकर फिर निजी अस्पताल पहुंचे और विशेषज्ञों को दिखाया। सीटी स्कैन और अन्य जांचें कराई गईं, लेकिन किसी तरह के अंदरूनी चोट का भी पता नहीं चला। सभी जांचों के बाद पाया गया कि बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है।

यह माता-पिता के लिए सुखद बात है, परंतु सभी के मन में अब भी कौतूहल बना हुआ है कि आखिर कैसे एक स्कूल बैग ने बच्चे की जान बचा ली।

इसमें विज्ञान के किसी नियम को सीधे तौर पर लागू होना नहीं माना जा सकता। जो जितनी ऊंचाई से गिरता है, उसका मोमेंटम उतना अधिक हो जाता है। बच्चा किस एंगल से गिरा, कैसे गिरा और इस दौरान बैग किस तरह नीचे आया, यह संयोग ही है, जिसने बच्चे की जान बच गई। भगवान ने ही उसकी रक्षा की। – यशपाल सिंह, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त गणित शिक्षक





