भिलाई के फौलाद से बढ़ेगी नौसेना की ताकत, INS अंजदीप जल्द भरेगा हुंकार
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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भिलाई के फौलाद से बढ़ेगी नौसेना की ताकत, INS अंजदीप जल्द भरेगा हुंकार
दुर्ग। भारत की सामरिक शक्ति और समुद्री सुरक्षा में ‘भिलाई स्टील प्लांट’ (BSP) का लोहा एक बार फिर दुनिया मानेगी। देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस अंजदीप (INS Anjadip) जल्द ही भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनने जा रहा है। खास बात यह है कि इस घातक वारशिप को बनाने में इस्तेमाल किया गया संपूर्ण विशेष-ग्रेड स्टील सेल (SAIL) के भिलाई, बोकारो और राउरकेला संयंत्रों द्वारा तैयार किया गया है।
स्वदेशी ताकत का नया चेहरा
आईएनएस अंजदीप ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) श्रेणी का तीसरा कार्वेट है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित यह पोत दुश्मन की पनडुब्बियों को उथले पानी में भी ढूंढ निकालने और उन्हें नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। इससे पहले आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ भी इसी विशेष फौलाद से बनकर नौसेना की सेवा में तैनात हैं।
भिलाई: रक्षा स्वदेशीकरण का मुख्य आधार
‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करते हुए सेल ने इस रणनीतिक परियोजना के लिए लगभग 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील की आपूर्ति की है। इसमें भिलाई इस्पात संयंत्र की भूमिका सबसे अग्रणी रही है। यह स्टील न केवल उच्च गुणवत्ता वाला है, बल्कि आयात पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करता है।
नौसैनिक विरासत का हिस्सा बना BSP
यह पहली बार नहीं है जब भिलाई के स्टील ने देश की सुरक्षा को मजबूती दी हो। इससे पहले देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस सूरत जैसे दिग्गज युद्धपोतों के निर्माण में भी भिलाई का विशेष योगदान रहा है। आईएनएस अंजदीप के शामिल होने से पुराने ‘अभय-श्रेणी’ के जहाजों की जगह अब आधुनिक और स्वदेशी ताकत लेगी।











