सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मजदूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश

 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मजदूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मजदूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने देश के करोड़ों असंगठित और संगठित क्षेत्र के मजदूरों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य और केंद्र सरकारों को उनके वेतन और काम की परिस्थितियों में सुधार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ‘सम्मानजनक जीवन’ (Right to Dignified Life) के अधिकार के तहत मजदूरों को केवल गुजारा करने लायक नहीं, बल्कि उनके कौशल और वर्तमान महंगाई के अनुसार उचित वेतन मिलना चाहिए।

प्रमुख बिंदु और कोर्ट के निर्देश:

1. महंगाई के अनुपात में वेतन वृद्धि:

कोर्ट ने कहा कि न्यूनतम वेतन की समीक्षा समय-समय पर की जानी चाहिए। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर ‘परिवर्तनीय महंगाई भत्ता’ (VDA) को वेतन का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए ताकि बढ़ती महंगाई का बोझ मजदूरों पर न पड़े।

2. ‘समान काम, समान वेतन’ का सिद्धांत:

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यदि कोई अनुबंध (Contract) मजदूर स्थायी कर्मचारी के समान ही काम कर रहा है, तो वह उसी वेतन दर का हकदार है। लिंग या रोजगार की प्रकृति के आधार पर वेतन में भेदभाव करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

3. ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण और लाभ:

अदालत ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी मजदूरों को राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ तुरंत सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि कोई भी मजदूर केवल दस्तावेजों की कमी के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।

4. काम के घंटों और ओवरटाइम पर सख्ती:

अदालत ने कार्यस्थलों पर मजदूरों के शोषण पर चिंता जताते हुए कहा कि तय घंटों से अधिक काम कराने पर अनिवार्य रूप से दोगुना ओवरटाइम भुगतान किया जाना चाहिए। साथ ही, स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

सरकार की जिम्मेदारी:

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करना ‘बलात श्रम’ (Forced Labour) के समान है, जो अनुच्छेद 23 के तहत दंडनीय है।

मजदूरों पर प्रभाव:

इस फैसले से निर्माण कार्य, कृषि, कारखानों और घरेलू कामगारों के रूप में कार्यरत करोड़ों लोगों को लाभ मिलेगा। अब राज्य सरकारों को अपने-अपने क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी की दरों को अपडेट करना होगा, जिससे मजदूरों की मासिक आय में 15% से 25% तक की वृद्धि होने की संभावना है।