बाघ संरक्षण में मप्र का मॉडल बना केस स्टडी, पांच वर्ष में बढ़े 259 टाइगर

 बाघ संरक्षण में मप्र का मॉडल बना केस स्टडी, पांच वर्ष में बढ़े 259 टाइगर

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

 

 

मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण के कई प्रयास किए गए।

 

देश में सर्वाधिक 785 बाघ मध्य प्रदेश में

बाघों को बचाने 200 गांव किए विस्थापित

टाइगर रिजर्व में लगातार बढ़ रहे पर्यटक

 

 

भोपाल: देश में सर्वाधिक बाघ मध्य प्रदेश के जंगल में हैं और इसके पीछे यहां उनके संरक्षण के प्रयासों का अनूठा मॉडल भी है। बाघों को बचाने के लिए यहां जंगल में बसे गांवों को विस्थापित करने में भी हिचक नहीं रही। वर्ष 2010 से 2022 तक विभिन्न टाइगर रिजर्व में बसे 200 गांवों को विस्थापित

 

 

बाघों का पुनर्स्थापन बना केस स्टडी

उधर, राज्य स्तरीय स्ट्राइक फोर्स ने पिछले आठ वर्षों में वन्य प्राणी अपराध करने वाले 550 आरोपितों को गिरफ्तार कर शिकार पर नकेल भी कसी है। बाघों के भोजन की उचित व्यवस्था के लिए हिरणों को भी विस्थापित कर बाघों की बहुलता वाले क्षेत्र में छोड़ा गया। इसके अलावा बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में सफल बाघ पुनर्स्थापन केस स्टडी बन चुका है।

बढ़ रही पर्यटकों की संख्या

टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 526 (वर्ष 2018 की गणना) से बढ़कर वर्ष 2022 तक 785 पहुंच गई। यह देश में सर्वाधिक है। मध्य प्रदेश में चार-पांच वर्ष में 259 बाघ बढ़े हैं। मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण के कई प्रयास किए गए।

 

 

बाघों के लिए भोजन आधार बढ़ा

गांवों को टाइगर रिजर्व से हटाने के अलावा कान्हा के बारहसिंगा, बायसन और वाइल्ड बोर को दूसरे टाइगर रिजर्व में बसाया गया, जिससे बाघों के लिए भोजन आधार बढ़ा। जंगल के बीच में जो गांव और खेत खाली हुए वहां घास के मैदान और तालाब विकसित किए गए जिससे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ी।

 

पिछले वर्ष 500 से अधिक चीतलों (हिरण प्रजाति) को अधिक आबादी वाले भाग से कम आबादी वाले एवं चीतल विहीन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया।

 

 

 

 

कान्हा टाइगर रिजर्व कॉरिडोर

कान्हा टाइगर रिजर्व भारत का पहला ऐसा कारिडोर है, जहां का प्रबंधन स्थानीय समुदायों, सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों और नागरिक संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है।

सुरक्षा पर ध्यान बाघों की सुरक्षा को लेकर भी कई कदम उठाए गए।

पन्ना टाइगर रिजर्व में ड्रोन से सर्वेक्षण और निगरानी रखी जा रही है।

वन्य प्राणियों से जुड़े अपराध में और शिकार पर भी सख्ती की गई।

550 आरोपित 14 राज्यों से गिरफ्तार किए गए। इसमें से 3 विदेशी थे।

चुनौतियां अब भी हैं

बाघों की जिस तरह से संख्या बढ़ रही है, उसके अनुरूप रहवास क्षेत्र विस्तार नहीं हो रहा है। आपसी संघर्ष की घटनाएं आए दिन सामने आती हैं। अब रातापानी और ओंकारेश्वर को टाइगर रिजर्व बनाने की तैयारी हो रही है।

 

ऐसे बढ़ी प्रदेश में बाघों की संख्या गणना

वर्ष बाघों की संख्या

2006 300

2010 257

2014 308

2018 526

2022 785

(स्रोतः राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण-एनटीसीए)

 

बाघ पर्यटन से जुड़े आंकड़े

प्रदेश में नेशनल पार्क-11

अभयारण्य-24

वित्तीय वर्ष पर्यटकों की संख्या (लाख में)

2020-21 13.96

2021-22 23.90

2022-23 26.49

(स्रोतः वन विभाग)

 

बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। वन विभाग की आय भी 13 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

 

– शुभरंजन सेन, प्रभारी पीसीसीएफ वन्यप्राणी