AAP में ‘महायुद्ध’: राघव चड्ढा का केजरीवाल पर सीधा वार, सौरभ भारद्वाज बोले- “पार्टी न होती तो परिणीति से शादी भी न होती”

 AAP में ‘महायुद्ध’: राघव चड्ढा का केजरीवाल पर सीधा वार, सौरभ भारद्वाज बोले- “पार्टी न होती तो परिणीति से शादी भी न होती”

राज्य  ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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AAP में ‘महायुद्ध’: राघव चड्ढा का केजरीवाल पर सीधा वार, सौरभ भारद्वाज बोले- “पार्टी न होती तो परिणीति से शादी भी न होती”

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पार्टी के युवा चेहरे रहे राघव चड्ढा के इस्तीफे और उनके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। एक तरफ राघव चड्ढा पार्टी को ‘भ्रष्ट’ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ AAP ने इसे भाजपा की एक बड़ी साजिश करार दिया है। इस जुबानी जंग में अब निजी टिप्पणियों का दौर भी शुरू हो गया है।

“पार्टी की बदौलत हुई राघव-परिणीति की शादी” – सौरभ भारद्वाज

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर तीखा पलटवार करते हुए बेहद व्यक्तिगत टिप्पणी की है। भारद्वाज ने कहा, “राघव चड्ढा की परिणीति चोपड़ा से शादी सिर्फ इसलिए हो पाई क्योंकि वे आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद थे। अगर वे सांसद न होते, तो उन्हें कोई नहीं पूछता।”

भारद्वाज ने राघव को ‘एहसान फरामोश’ बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें पहचान और रुतबा दिया, आज वे उसी के खिलाफ भाजपा के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि अगर नौकरी भी छोड़नी हो तो तीन महीने का नोटिस दिया जाता है, लेकिन राघव जिस थाली में खाए, उसी में छेद कर रहे हैं।

राघव चड्ढा का पलटवार: “पार्टी अब जहरीली हो चुकी है”

वहीं, राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेतृत्व पर तीखे सवाल दागे हैं। चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने अपना जमा-जमाया सीए (CA) का करियर छोड़कर 15 साल तक इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा था। लेकिन आज पार्टी का माहौल जहरीला हो गया है। AAP अब उन भ्रष्ट लोगों के हाथों की कठपुतली बन गई है, जिनके खिलाफ हम लड़ने निकले थे।”

राघव ने साफ तौर पर कहा कि जहां काम करने की आजादी न हो और ईमानदारी की जगह न बचे, वहां रुकने का कोई मतलब नहीं है।

भाजपा के साथ ‘साठगांठ’ के आरोप

पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि राघव चड्ढा अपनी एक अलग राजनीतिक छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें उन्हें भाजपा का पूरा समर्थन मिल रहा है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, यह इस्तीफा महज एक पद छोड़ना नहीं बल्कि पार्टी को जड़ से बर्बाद करने की एक सुनियोजित साजिश है।

निष्कर्ष:

कभी केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाने वाले राघव चड्ढा और ‘आप’ के बीच की यह जंग अब उस मोड़ पर आ गई है, जहां से वापसी नामुमकिन लग रही है। राजनीति के इस दंगल में अब देखना यह होगा कि राघव चड्ढा का अगला कदम क्या होगा और ‘आप’ इस बड़े झटके से कैसे उबरती है।