सावधान: आपकी एक ‘सर्च’ आपको पहुंचा सकती है जेल, जानें इंटरनेट पर क्या खोजना है खतरनाक
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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सावधान: आपकी एक ‘सर्च’ आपको पहुंचा सकती है जेल, जानें इंटरनेट पर क्या खोजना है खतरनाक
नई दिल्ली | आज के डिजिटल युग में इंटरनेट, सर्च इंजन और AI हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम अपनी हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए गूगल या एआई टूल्स का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी हर क्लिक और सर्च का एक डिजिटल फुटप्रिंट (Record) बन रहा है? भारत में ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर कानून अब पहले से कहीं अधिक सख्त हो गए हैं।
डिजिटल निगरानी और भारतीय कानून
भारत में IT एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम), भारतीय न्याय संहिता (BBS – जो पूर्व में IPC था) और UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) जैसी धाराएं डिजिटल गतिविधियों पर पैनी नजर रखती हैं। सुरक्षा एजेंसियां और साइबर सेल संदिग्ध कीवर्ड्स और गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक टूल्स का उपयोग करती हैं।
भूलकर भी न करें ये चीजें सर्च
जानकारों के मुताबिक, कई बार कौतूहल या अनजाने में की गई सर्च भी आपको जांच के घेरे में ला सकती है। निम्नलिखित विषयों पर सर्च करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है:
आतंकी सामग्री: प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की विचारधारा, उनके प्रचार वीडियो या भर्ती प्रक्रिया के बारे में जानकारी खोजना।
अवैध हथियार और विस्फोटक: घर पर बम बनाने का तरीका, अवैध हथियार खरीदने के स्रोत या प्रतिबंधित रसायनों के मिश्रण की जानकारी।
बाल यौन शोषण सामग्री: भारत में बाल यौन शोषण सामग्री देखना, सर्च करना या शेयर करना एक गंभीर दंडनीय अपराध है, जिसमें तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है।
देश विरोधी प्रोपेगेंडा: देश की अखंडता के खिलाफ सामग्री या प्रतिबंधित समूहों के संपर्क सूत्र खोजना।
UAPA और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बार-बार संदिग्ध कीवर्ड्स सर्च करता है, तो एल्गोरिदम इसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसियों को दे देते हैं। विशेष रूप से आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सर्च होने पर UAPA जैसे कठोर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून में जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है और व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रहना पड़ सकता है, भले ही उसका इरादा कोई अपराध करने का न रहा हो।
कैसे रहें सुरक्षित?
सजग रहें: इंटरनेट का उपयोग केवल शिक्षा, मनोरंजन और सामान्य जानकारी के लिए करें।
प्राइवेट मोड का भ्रम: कई लोग सोचते हैं कि ‘Incognito’ या प्राइवेट मोड में सर्च करने पर रिकॉर्ड नहीं बनता, जबकि आपका ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) और एजेंसियां फिर भी डेटा ट्रैक कर सकती हैं।
संदिग्ध लिंक से बचें: डार्क वेब या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें जो आपको प्रतिबंधित सामग्री तक ले जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
डिजिटल दुनिया में आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है। याद रखें, इंटरनेट पर आपकी “प्राइवेसी” पूरी तरह निजी नहीं है। कानून की नजर हर उस कीवर्ड पर है जो देश की सुरक्षा या सामाजिक मर्यादा के खिलाफ हो सकता है।
अधिक कानूनी जानकारी के लिए आप भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र या डिजिटल इंडिया पोर्टल पर जा सकते हैं।












