मृत भालू के पंजे, गुप्तांग व नाखून थे गायब, डाग की मदद से तीन गिरफ्तार
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
वन विभाग की गिरफ्त में मृत भालू का पंजा, नाखून व काटने वाले तीनों आरोपित।
मरवाही वन परिक्षेत्र में मिली थी संदिग्ध लाश
न विभाग ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है
आरोपितों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज किया गया है
बिलासपुर। मरवाही वन परिक्षेत्र के लटकोनी खुर्द परिसर में तीन माह के भालू की मौत के बाद पंजे, नाखून व गुप्तांग काट लिया गया था। जांच के दौरान वन विभाग ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों के कब्जे से भालू के कटे अंग को जब्त कर लिया गया। आरोपितों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
घटना रविवार को कक्ष क्रमांक 1968 में हुई थी। मवेशी चराने गए एक ग्रामीण ने सबसे पहले मृत भालू को देखा। उसने इसकी जानकारी वनकर्मियों को दी। वन अफसर भी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान आगे पैर का दोनों पंजा, पिछले पैर के नाखून और गुप्तांग गायब थे। इस बीच पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में मौत की वजह कुत्ते के हमले से होने की पुष्टि हुई। लेकिन, पंजे, नाखून व गुप्तांग किसी ने जानबूझकर काटा था। इसी संदेह पर रात में ही रायपुर जंगल सफारी के डाग स्क्वाड को बुलाया गया। रविवार की रात दो बजे के करीब डाग पहुंचा और उसे लेकर घटना स्थल पर पहुंचे। इसके बाद डाग सीधे आरोपितों के घर पर पहुंच गया। मामले में सबसे पहले अयोध्या उर्फ आदेश यादव और उसके अमृत लाल गोंड़ व भाव सिंह गोंड को पकड़ लिया गया। तीनों लटकोनीखुर्द गांव के निवासी हैं। पहले तो तीनों घटना की जानकारी न होने की बात कहते रहे। लेकिन, सख्ती बरतने पर मृत भालू के आगे पैर के दोनों पंजे, पिछले पैर का नाखून एवं गुप्तांग को काटकर अपने पास रखने का अपराध स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर इस कृत्य में प्रयुक्त कुल्हाड़ी को बरामद कर लिया गया। सोमवार को तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर मरवाही परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया। इसके बाद उनके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
इसलिए काटते हैं अंग
भालू को लेकर यह धारणा है कि उसके गुप्तांग से पौरुष बढ़ता है, हालांकि इसका कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। इसके अलावा नाखून, पंजे व बाल अच्छी कीमत में बिकती है। विभाग तरह की धारणा को निराधार मानता है। विभाग का कहना है कि वन्य प्राणी को नुकसान पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आता है।





