2047 तक भारत को संस्कृति के साथ विकसित राष्ट्र बनाना युवाओं का लक्ष्य: प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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2047 तक भारत को संस्कृति के साथ विकसित राष्ट्र बनाना युवाओं का लक्ष्य: प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा

भिलाई नगर। कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई नगर के वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय द्वारा ‘भारतीय संस्कृति, गौरव और युवाओं की भूमिका’ विषय पर एक भव्य अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के वाणिज्य संकाय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. राकेश ढांड थे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति का बोध कराते हुए देश और मातृभाषा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया।

मातृभाषा में करें हस्ताक्षर, सार्वजनिक स्थानों पर बोलने में न करें संकोच

अपने ओजस्वी उद्बोधन में डॉ. राकेश ढांड ने स्थानीय और राष्ट्रीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम केवल यह नारा लगाते रहेंगे कि ‘सबसे बढ़िया छत्तीसगढ़िया’ तो यह सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा। यदि छत्तीसगढ़ी जानने वाले दो लोग भी सार्वजनिक स्थानों पर आपस में इस भाषा में बात नहीं करेंगे, तो यह भाषा अपनी मूल संस्कृति से विस्मृत होकर केवल इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगी।” उन्होंने छात्रों से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि वे अपने हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में क्यों नहीं करते? डॉ. ढांड ने सचेत किया कि यदि हम अपनी संस्कृति को छोड़ते जाएंगे, तो हमारा पतन निश्चित है।

वैज्ञानिकता को अपनाएं, लेकिन पहचान न खोएं

डॉ. ढांड ने छात्रों को आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत जिस मुकाम पर है, उसके पीछे अनगिनत राष्ट्रभक्तों का बलिदान है। हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिकता को जरूर अपनाना चाहिए, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से हमेशा जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने गोत्र परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारा गोत्र हमें हमारे ऋषियों और देवों से जोड़ता है। प्राचीन भारत में पहचान जाति से नहीं बल्कि कर्म से होती थी, हमें फिर से उसी कर्मप्रधान देश का निर्माण करना है।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “कोई पूछे कि आप कौन हैं, तो सबसे पहले गर्व से कहें कि ‘मैं भारतीय हूँ’। आपकी भारतीयता आपकी वेशभूषा, भाषा और व्यवहार में झलकनी चाहिए। युवा ही इस संस्कृति को प्रगति के पथ पर ले जाकर इसका पुनरुत्थान कर सकते हैं।”

छात्र जीवन स्वर्णिम समय, 2047 के विकसित भारत की जिम्मेदारी युवाओं पर: डॉ. विनय शर्मा

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा, मुख्य वक्ता डॉ. राकेश ढांड और प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार कश्यप ने माँ सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर किया।

स्वागत भाषण देते हुए ऊर्जावान प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा, “छात्र जीवन आपका स्वर्णिम समय है। इस समय को अपने लक्ष्यों को हासिल करने में लगाएं। पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलकूद और ज्ञान-विज्ञान में रुचि बनाए रखें।” उन्होंने आगे कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और साल 2047 तक हमें अपनी समृद्ध संस्कृति को संजोए रखते हुए भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।

गरिमापूर्ण उपस्थिति और आभार

कार्यक्रम का सफल संचालन महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. रवीश सोनी द्वारा किया गया, जबकि वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार कश्यप ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस गरिमापूर्ण अवसर पर महिला महाविद्यालय से प्रो. डॉ. एम. माधवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। साथ ही महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. निशा, श्री शिवानंद, श्री अमित, श्री योगेश, श्री जितेंद्र, श्री कोमेश, श्री आदित्य, सुश्री आफरीन, सुश्री श्रद्धा, श्री विमल, श्री रामेश्वर सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे और व्याख्यान का लाभ उठाया।