नक्सल मुक्त’ दावों के बीच कांकेर में फिर गूंजा ‘लाल सलाम’: पुष्प स्टील माइंस में 3 पोकलेन फूंके, मिले धमकी भरे पर्चे
छत्तीसगढ़ राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान
***********************************
‘नक्सल मुक्त’ दावों के बीच कांकेर में फिर गूंजा ‘लाल सलाम’: पुष्प स्टील माइंस में 3 पोकलेन फूंके, मिले धमकी भरे पर्चे
कांकेर/:छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2026 को पूरे बस्तर संभाग को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किए जाने के महज कुछ ही समय बाद सुरक्षा तंत्र पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। कांकेर जिले के लोहत्तर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चेमल स्थित ‘पुष्प स्टील लिमिटेड’ की लौह अयस्क (आयरन ओर) खदान में अज्ञात हमलावरों ने देर रात धावा बोलकर भारी तबाही मचाई। उपद्रवियों ने खदान परिसर में खड़ी तीन पोकलेन मशीनों को आग के हवाले कर दिया, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गईं।
घटनास्थल से ‘लाल सलाम’ लिखे दो धमकी भरे पर्चे भी बरामद हुए हैं, जिससे इलाके में एक बार फिर दहशत का माहौल है।
रात में थमा काम, सुबह मलबे में तब्दील मिलीं मशीनें
मिली जानकारी के अनुसार, बीते शाम खदान में रोजमर्रा का काम खत्म होने के बाद सभी मजदूर अपने-अपने घर और कैंप लौट गए थे। आज सुबह जब मजदूर वापस ड्यूटी पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनें धू-धू कर जल चुकी थीं।
घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लोहत्तर पुलिस टीम के साथ SDOP शेर बहादुर सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है, जो फिंगरप्रिंट्स और आग लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए ज्वलनशील पदार्थों के साक्ष्य जुटा रही है।
पर्चे में ‘लाल सलाम’ और 7 दिन की मोहलत
इस वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू मौके से मिले दो पर्चे हैं। पर्चों में:
खदान को नियमित रूप से संचालित करने की बात कही गई है।
एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर मांगें पूरी करने की चेतावनी दी गई है।
पर्चे के अंत में ‘लाल सलाम’ अंकित है।
पर्चे की भाषा और वारदात का तरीका पूरी तरह से पारंपरिक नक्सली शैलियों (Modus Operandi) से मेल खाता है।
बस्तर ‘नक्सल मुक्त’ होने के बाद पहली बड़ी चुनौती
वर्ष 2026 में बस्तर को नक्सल गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया था। इस घोषणा के बाद नक्सली अंदाज में अंजाम दी गई यह पहली बड़ी घटना है, जिसने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की नींद उड़ा दी है।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि औपचारिक घोषणा के बावजूद कांकेर के दूरदराज इलाकों में कुछ बचे-कुचे नक्सली तत्व अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी रहते हैं।
नक्सली साजिश या किसी आपराधिक गिरोह की चाल? जांच में जुटी पुलिस
हालांकि घटना स्थल से नक्सली पर्चे मिले हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन अभी इसे आधिकारिक रूप से नक्सली हमला मानने से बच रहा है। जांच अधिकारी दो मुख्य पहलुओं पर काम कर रहे हैं:
अवशेष नक्सली गुटों की मौजूदगी: क्या बस्तर में बचे-कुचे असामाजिक/नक्सली तत्वों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए इस घटना को अंजाम दिया है?
नक्सल नाम का दुरुपयोग: क्या किसी स्थानीय असामाजिक तत्व, ठेकेदार विवाद या आपराधिक गिरोह ने लेवी (वसूली) के मकसद से नक्सली तरीका अपनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की है?
पुलिस का बयान:
“फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटा रही है और आसपास के जंगलों में सर्चिंग बढ़ा दी गई है। पर्चों की प्रामाणिकता की जांच जारी है। विवेचना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह वास्तविक नक्सली वारदात है या किसी अन्य समूह की साजिश।” — पुलिस प्रशासन, कांकेर





