उमस और घोषित-अघोषित बिजली कटौती का तांडव: पामगढ़ के मुड़पार-चुरतेला-खरखोद में हाहाकार, राशन दुकानें ठप, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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उमस और घोषित-अघोषित बिजली कटौती का तांडव: पामगढ़ के मुड़पार-चुरतेला-खरखोद में हाहाकार, राशन दुकानें ठप, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

पामगढ़। बरसात के बाद बढ़ी भीषण उमस और बिजली विभाग की मनमानी कटौती ने पामगढ़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का जीवन नरक बना दिया है। एक तरफ जहां आसमान से बरसती उमस और गर्मी से लोग बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ रसौटा सब-स्टेशन की लचर व्यवस्था के कारण बार-बार हो रही बिजली कटौती ग्रामीणों पर ‘डबल अटैक’ साबित हो रही है। मुड़पार, चुरतेला और खरखोद सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट विकराल रूप धारण कर चुका है।

रातों की नींद हराम, बच्चे-बुजुर्ग बेहाल

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, उमस भरे इस मौसम में पंखे और कूलर ही जीने का सहारा हैं। लेकिन घंटों बिजली गुल रहने के कारण बंद घरों में उमस और तपन सहना असहनीय हो गया है। सबसे बुरी स्थिति मासूम बच्चों और बुजुर्गों की है, जो भीषण गर्मी में बिलबिला रहे हैं। रात-रात भर बिजली बंद रहने से लोगों की नींद हराम हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।

रसौटा सब-स्टेशन बना शो-पीस, सवालों के घेरे में व्यवस्था

बिजली संकट से उबरे बिना ग्रामीणों का गुस्सा रसौटा सब-स्टेशन की कार्यप्रणाली पर फूट पड़ा है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि बार-बार शिकायत करने और संपर्क साधने के बावजूद सब-स्टेशन से कोई स्पष्ट जवाब या ठोस समाधान नहीं मिलता। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। हालाँकि, इस पूरे मामले पर बिजली विभाग का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है।

बिल की वसूली में सख्ती, पर सेवा में ठन-ठन गोपाल

ग्रामीणों ने बिजली विभाग के दोहरे रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिल वसूलने में तो विभाग जरा भी ढील नहीं देता और समय पर भुगतान न होने पर कार्रवाई की धमकी दी जाती है, तो फिर नियमपूर्वक बिल भरने के बाद भी उन्हें निर्बाध बिजली क्यों नहीं दी जा रही?

बिजली बंद तो राशन ठप: सरकारी मशीनरी पंगु

बिजली कटौती की मार अब सीधे गरीबों की थाली पर पड़ने लगी है। विद्युत आपूर्ति बाधित रहने से शासकीय राशन दुकानों की ई-पॉस (E-PoS) मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है। दूर-दराज़ से राशन लेने पहुंचे हितग्राहियों को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ रहा है या बिना राशन लिए खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। बिजली विभाग की लापरवाही ने अब खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भी ठप कर दिया है।

आर-पार के मूड में ग्रामीण: उठ रहे ये गंभीर सवाल

समस्या का कोई स्थायी समाधान न निकलता देख ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन और विभाग के सामने दागे ये 4 तीखे सवाल:

भीषण उमस के मौसम में लगातार और बिना सूचना के बिजली क्यों काटी जा रही है?

रसौटा सब-स्टेशन की बदहाली और अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन है? इसकी निगरानी कौन कर रहा है?

जब उपभोक्ता हर महीने समय पर बिल भर रहे हैं, तो उन्हें 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिल रही?

बिजली कटौती से राशन वितरण ठप होने और गरीबों के परेशान होने की जवाबदेही किसकी है?

अब देखना यह होगा कि पामगढ़ क्षेत्र के इस गंभीर बिजली संकट और ग्रामीणों के जनाक्रोश पर बिजली विभाग के आला अधिकारी कब जागते हैं और प्रभावित गांवों को इस नर्क से कब मुक्ति मिलती है।