प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर झारावाही के ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा, श्रमदान कर बहाल किया संपर्क मार्ग
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर झारावाही के ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा, श्रमदान कर बहाल किया संपर्क मार्ग
नारायणपुर: बस्तर और अबूझमाड़ के सुदूर अंचलों में ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने’ के प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक तस्वीर नारायणपुर जिले से सामने आई है। ग्राम पंचायत झारावाही में जब लगातार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो बेबस ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर आवागमन का रास्ता दुरुस्त कर दिया।
तीन गांवों का संपर्क कटा
झारावाही से हतलानार होते हुए नारायणपुर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग हालिया बारिश में पुलिया बह जाने के कारण जमींदोज हो गया था। इसके चलते झारावाही, हतलानार और दुम्मा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया। स्कूली बच्चे, बीमार बुजुर्ग और आपातकालीन मरीज गांव में ही कैद होकर रह गए थे।
अधिकारियों के चक्कर काटने पर भी नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया बहने की सूचना जनपद पंचायत से लेकर जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को दी गई थी। लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर जाकर जायजा तक नहीं लिया।
लकड़ी और रस्सियों के सहारे उठाया भारी ह्यूम पाइप
प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर तीनों गांवों के लोग एकजुट हुए। बिना किसी सरकारी मशीनरी या क्रेन के, ग्रामीणों ने लकड़ी और रस्सियों के देसी जुगाड़ से कई क्विंटल वजनी सीमेंट (ह्यूम) पाइप को कंधों पर उठाकर बह चुके नाले में स्थापित किया और अस्थाई रास्ता तैयार किया।
यह घटना जहां अबूझमाड़ के लोगों के अदम्य साहस को दर्शाती है, वहीं आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों के इस कदम के बाद प्रशासन जागेगा या पक्की सड़क का इंतजार जारी रहेगा।





