नेटवर्क गायब होने पर आया गुस्सा, रील देख रही 52 वर्षीय महिला ने पिया कीटनाशक; गोबर-पानी पिलाने के बाद भी नहीं बची जान

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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नेटवर्क गायब होने पर आया गुस्सा, रील देख रही 52 वर्षीय महिला ने पिया कीटनाशक; गोबर-पानी पिलाने के बाद भी नहीं बची जान

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सोशल मीडिया की लत और अचानक उपजे गुस्से का एक खौफनाक मामला सामने आया है। करतला थाना क्षेत्र के केराकछार गांव में मोबाइल पर रील देखते समय नेटवर्क चले जाने से नाराज 52 वर्षीय महिला ने कथित तौर पर कीटनाशक पी लिया। इलाज के दौरान अस्पताल में महिला ने दम तोड़ दिया।

खाना खाते समय देख रही थी रील

मृतका की पहचान 52 वर्षीय मंगलो बाई के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मंगलो बाई खाना खाते समय मोबाइल पर रील देख रही थी, तभी अचानक नेटवर्क चला गया। इससे आक्रोशित होकर उसने पहले अपना मोबाइल जमीन पर पटककर तोड़ दिया और फिर घर में रखा जहरीला कीटनाशक गटक लिया।

अंधविश्वास और पुरानी मान्यता से बिगड़ी हालत

महिला द्वारा जहर पीने की बात पता चलते ही परिजन घबरा गए। पुरानी मान्यताओं के आधार पर महिला को उल्टी कराने के उद्देश्य से परिजनों ने उसे गोबर-पानी पिला दिया। महिला के पति प्रेमलाल ने बताया कि गांव में चली आ रही कहावत के आधार पर उन्होंने ऐसा कदम उठाया। हालांकि, गोबर-पानी पिलाने से महिला की स्थिति और अधिक बिगड़ गई।

अस्पताल में इलाज के दौरान मौत

तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन संजीवनी 108 की मदद से महिला को तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने गंभीर हालत में उसका उपचार शुरू किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस जांच में जुटी

नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक बयानों से स्पष्ट हुआ है कि मोबाइल का नेटवर्क जाने से उपजे गुस्से में महिला ने यह आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

चिंताजनक आंकड़े: 8 महीने में 57 जानें गईं

कोरबा जिले में आत्महत्या के बढ़ते मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।

आंकड़े: जिले में बीते 8 महीनों के भीतर 57 लोग आत्महत्या कर अपनी जान गंवा चुके हैं।

सोशल मीडिया की लत: विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग अब लोगों की मानसिक स्थिति और आक्रामक व्यवहार का कारण बन रहा है।

विशेषज्ञों की राय: अचानक उत्पन्न होने वाला आवेश और गुस्से पर नियंत्रण न होना लोगों को ऐसे घातक कदम उठाने पर मजबूर कर देता है।