धमतरी में भारी बवाल: मूलभूत सुविधाओं को तरसे 52 गांवों के आदिवासियों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, प्रशासन के छूटे पसीने
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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धमतरी में भारी बवाल: मूलभूत सुविधाओं को तरसे 52 गांवों के आदिवासियों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, प्रशासन के छूटे पसीने
धमतरी। जिले के आदिवासी अंचलों में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का सब्र आखिरकार सोमवार को टूट गया। प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज लगभग 52 गांवों के सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। शोभाराम देवांगन चौक से कलेक्ट्रेट तक निकले इस विशाल पैदल मार्च में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरातल पर काम करने की मांग पर अड़ गए।
📌 केवल आश्वासन से नाराज, जमीनी काम की मांग
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वे वर्षों से सड़क, स्वच्छ पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए गुहार लगा रहे हैं। शासन और प्रशासन ने उन्हें हमेशा केवल खोखले आश्वासन दिए हैं। धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने से वनांचल के लोगों का जीवन दुश्वार हो चुका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब कागजी दावों और आश्वासनों का वक्त खत्म हो चुका है, उन्हें जमीन पर विकास कार्य चाहिए।
👮 पुलिस की घेराबंदी तोड़ आगे बढ़े ग्रामीण
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह से ही विभिन्न आदिवासी अंचलों से ग्रामीण वाहनों में भरकर धमतरी पहुंचने लगे थे। शोभाराम देवांगन चौक पर एकत्र होने के बाद जब ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया, तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। अधिकारियों की समझाइश और बैरिकेडिंग को दरकिनार करते हुए आंदोलित ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट के मुहाने तक जा पहुंचे।
👥 संख्या बल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन में 500 से लेकर 2000 तक की संख्या में ग्रामीण शामिल थे, जिनमें भारी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी मौजूद रहे। इतनी बड़ी तादाद में आदिवासियों के जुटने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
⚠️ कलेक्टर से सीधे मुलाकात पर अड़े, उग्र आंदोलन की चेतावनी
आंदोलनकारी ग्रामीण किसी भी छोटे अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के लिए तैयार नहीं हुए। वे सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी आपबीती सुनाने और लिखित आश्वासन लेने की मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि अगर उनकी जायज मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। खबर लिखे जाने तक प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे रहे।





