महासमुंद में ड्राइवरों की हुंकार: 15 सूत्रीय मांगों को लेकर निकाली विशाल रैली, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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महासमुंद में ड्राइवरों की हुंकार: 15 सूत्रीय मांगों को लेकर निकाली विशाल रैली, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
महासमुंद, : छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ के बैनर तले सोमवार को महासमुंद जिले में हजारों वाहन चालकों ने अपनी सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मांगों को लेकर एक विशाल आंदोलन किया। महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह आंदोलन प्रदेश के सभी 33 जिलों में एक साथ आयोजित किया जा रहा है। ड्राइवरों ने शहर के बस स्टैंड से पोस्टर और बैनरों के साथ एक बड़ी रैली निकाली। इस दौरान सरकार विरोधी और अधिकारों के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए वे कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे。 वहां उन्होंने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और गृह मंत्री के नाम जिला प्रशासन (कलेक्टर) को अपनी 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
🚨 “ड्राइवर अर्थव्यवस्था की रीढ़,
लेकिन उपेक्षित”महासंघ के पदाधिकारियों और प्रदेश अध्यक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि राज्य के हजारों वाहन चालक दिन-रात सड़क परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके बावजूद, उनकी सुरक्षा और हितों के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन भविष्य में और उग्र रूप धारण करेगा।
📋 महासंघ की प्रमुख मांगें जिन पर रहा विशेष जोर:
₹20 लाख का दुर्घटना बीमा: किसी भी वाहन चालक की ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में उनके परिवार को ₹20 लाख का अनिवार्य बीमा कवर दिया जाए।₹10 लाख की सहायता राशि: सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने वाले चालकों को इलाज और आर्थिक संबल के लिए ₹10 लाख तक की सहायता राशि तुरंत दी जाए।विशेष सामाजिक सुरक्षा कानून: ड्राइवरों के अधिकारों, काम के घंटों और सुरक्षा को कानूनी संरक्षण देने के लिए एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कानून बनाया जाए।
पेंशन और वर्दी भत्ता: लंबे समय तक सेवाएं देने वाले चालकों को 55 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद मासिक पेंशन की सुविधा मिले और सभी को नियमित वर्दी भत्ता दिया जाए।
हाईवे पर विश्राम गृह और टॉयलेट: लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवरों की थकान और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक 100 किलोमीटर पर आधुनिक विश्राम गृह, शेड और स्वच्छ टॉयलेट बनाए जाएं।
अनावश्यक उत्पीड़न पर रोक: सार्वजनिक सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) पर जांच के नाम पर सुरक्षा एजेंसियों या पुलिस द्वारा चालकों को बेवजह परेशान करना बंद किया जाए।
सख्त सड़क सुरक्षा और पार्किंग: हाईवे पर सड़क सुरक्षा नियमों को कड़ाई से लागू किया जाए, नियमित सुरक्षा अभियान चलें और व्यावसायिक वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग स्थल विकसित किए जाएं।ड्राइवर दिवस की घोषणा: महासंघ ने सरकार से मांग की है कि ड्राइवरों के सम्मान में हर साल 1 सितंबर को आधिकारिक ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित किया जाए।





