दुर्ग में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का रास्ता साफ करने की तैयारी, 500 परिवारों की आजीविका पर संकट; दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक जगह
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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दुर्ग में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का रास्ता साफ करने की तैयारी, 500 परिवारों की आजीविका पर संकट; दुकानदारों ने मांगी वैकल्पिक जगह
दुर्ग।दुर्ग के पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के साथ विकसित करने के प्रशासन के फैसले ने स्थानीय दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना और दशकों से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों के बीच पुनर्वास को लेकर गतिरोध खड़ा हो गया है।

प्रशासन का फैसला और एक माह का नोटिस
क्रीड़ांगन समिति का निर्णय: मंगलवार को हुई जिला क्रीड़ांगन समिति की बैठक में स्टेडियम परिसर की दुकानों को खाली कराने का फैसला लिया गया।अनुबंध की शर्तें: दुकानदारों को अनुबंध शर्तों के तहत दुकान खाली करने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जा रहा है।प्रशासन का लक्ष्य: परिसर को पूरी तरह खाली कराकर अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण शुरू करना।
दुकानदारों का पक्ष:
“विकास का विरोध नहीं, पर पुनर्वास जरूरी”कलेक्टर जनदर्शन में गुहार: नोटिस के फैसले के अगले ही दिन (बुधवार) बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और आवेदन सौंपा।

भविष्य की चिंता:
व्यापारियों की मांग है कि उन्हें दुकानें खाली करने से पहले ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ या किसी अन्य उपयुक्त व्यावसायिक क्षेत्र में वैकल्पिक जगह आवंटित की जाए।
500 परिवारों की रोजी-रोटी दांव पर40 वर्षों का सफर:
स्टेडियम परिसर के आसपास करीब 100 दुकानें पिछले 40 सालों से संचालित हो रही हैं।बड़ा आश्रित वर्ग: प्रत्येक दुकान में औसतन 4 से 5 लोग काम करते हैं।
गहराता संकट:
अचानक दुकानें हटने से लगभग 500 परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों ने साफ किया है कि बिना ठोस पुनर्वास व्यवस्था के वे दुकानें खाली नहीं करेंगे।प्रशासन अब इस गतिरोध को सुलझाने और खेल विकास के साथ-साथ इन परिवारों के रोजगार को बचाने के बीच का रास्ता तलाशने की चुनौती का सामना कर रहा है।





