कचरे के ढेर से मिली पुरानी मोबाइल बैटरी बनी काल: आग में डालते ही हुआ जोरदार धमाका, 1 साल के मासूम की मौत

 कचरे के ढेर से मिली पुरानी मोबाइल बैटरी बनी काल: आग में डालते ही हुआ जोरदार धमाका, 1 साल के मासूम की मौत

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

 

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कचरे के ढेर से मिली पुरानी मोबाइल बैटरी बनी काल: आग में डालते ही हुआ जोरदार धमाका, 1 साल के मासूम की मौत

 

 

अम्बिकापुर/सूरजपुर:छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रेमनगर क्षेत्र के ब्रम्हापुर गांव में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ कचरे के ढेर से मिली एक पुरानी मोबाइल फोन की बैटरी फटने से 1 साल के मासूम बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके और पीड़ित परिवार में मातम पसरा हुआ है।

खेल-खेल में हुआ खौफनाक हादसा

मृतक बच्चे के पिता महेंद्र सिंह नेताम (डीके सिंह) ने बताया कि उनका 1 साल का बेटा आदित्य सिंह अपने भाई-बहनों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते बच्चे घर के बाहर बाड़ी की तरफ बने कचरे के ढेर के पास चले गए। वहाँ बच्चों को एक पुरानी और खराब मोबाइल बैटरी मिल गई, जिसे वे उठाकर घर ले आए।शाम के वक्त जब बच्चों की माँ नल पर पानी भरने गई थी, तब घर के पास जल रही आग में बच्चों ने खेल-खेल में उस बैटरी को डाल दिया। आग के संपर्क में आते ही बैटरी तेज धमाके के साथ फट गई। आग और ब्लास्ट के बेहद करीब होने के कारण मासूम आदित्य इसकी चपेट में आ गया, जिससे उसका चेहरा, पेट और सीना बुरी तरह झुलस गया।तीन अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद तोड़ा दमपरिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, जोरदार धमाके की आवाज सुनकर जब माँ दौड़कर आई तो बच्चा गंभीर रूप से झुलस चुका था। आनन-फानन में मासूम को पहले प्रेमनगर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार और मलहम-पट्टी के बाद उसे सूरजपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर किया। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बच्चे को तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया, लेकिन गंभीर रूप से झुलस चुके मासूम ने इलाज के दौरान अलसुबह करीब 4 बजे दम तोड़ दिया।

अपनों का रो-रोकर बुरा हाल”

मेरे बेटे को कचरे के ढेर में एक पुरानी बैटरी मिली थी। उसने खेल-खेल में उसे आग में डाल दिया जिससे यह हादसा हो गया,” बिलखते हुए मृतक के पिता ने यह बात कही। वहीं परिजन किसन का कहना है कि बैटरी ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि बच्चे को सँभलने का मौका ही नहीं मिला।

ई-वेस्ट (E-Waste) का सही निपटारा बेहद जरूरी

यह हादसा हमें एक बड़ी चेतावनी देता है। घरों में बेकार पड़े पुराने मोबाइल, चार्जर और बैटरियां (ई-कचरा) इंसानों के साथ-साथ जानवरों और पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक हैं। यदि हम वैज्ञानिक तरीकों और तय मानकों के जरिए ई-वेस्ट का सही निपटारा (E-waste disposal) करें, तो इस तरह के जानलेवा हादसों को रोका जा सकता है। पुरानी बैटरियों को कभी भी खुले कचरे में न फेंकें और न ही बच्चों की पहुँच में आने दें।