बीजापुर में 21 मवेशियों की मौत, पशु पालकों पर टूटा आर्थिक संकट
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बीजापुर में 21 मवेशियों की मौत, पशुपालकों पर टूटा आर्थिक संकट
जगदलपुर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मौसम के बदलते मिजाज के बीच आकाशीय बिजली (गाज) गिरने से भारी नुकसान हुआ है। जगदलपुर और बीजापुर जिलों में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में कुल 21 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस प्राकृतिक आपदा से स्थानीय ग्रामीण और पशुपालक सदमे में हैं, क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह इन्हीं पशुओं पर टिकी थी।
घटना 1: जगदलपुर के चिलकुटी में 11 मवेशियों की मौत
जगदलपुर शहर से सटे चिलकुटी गांव के सुरंगियापारा में तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से 11 मवेशियों ने दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मवेशी बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे जमा थे, तभी अचानक वज्रपात हुआ। इस घटना के बाद से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके जीवन की बड़ी आर्थिक क्षति है।
घटना 2: बीजापुर के पोन्दुम गांव में 10 मवेशी मरे
दूसरी घटना बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत पोन्दुम गांव की है। शनिवार शाम करीब 7:30 बजे जब मौसम बदला, तब खेत और खुले मैदान में चर रहे 10 मवेशी बिजली की चपेट में आ गए। अचानक हुए इस वज्रपात से सभी मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई।इन पशुपालकों को हुआ भारी नुकसानपोन्दुम गांव में हुए इस हादसे से कई गरीब परिवार प्रभावित हुए हैं:लक्ष्मण हपका, बुधराम हपका और दशरथ बघेल: प्रत्येक के 2-2 मवेशी मरे।पिंकी बघेल, सुंदरी हपका, आसमती हपका और मन्नू हपका: प्रत्येक के 1-1 मवेशी की मौत।ग्रामीणों ने बताया कि मरने वाले अधिकांश मवेशी सफेद रंग के थे और उनके घरों की आजीविका का मुख्य जरिया थे।ग्रामीणों ने की मुआवजे की मांगइस आकस्मिक आपदा से प्रभावित परिवारों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्व और पशुपालन विभाग की टीम तुरंत मौके पर भेजकर सर्वे कराया जाए और प्रभावित पशुपालकों को उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए।
मौसम विभाग की चेतावनी और सुरक्षा अपील
बस्तर और आसपास के इलाकों में बारिश के दौरान गाज गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मौसम में खुले मैदान, खेतों या पेड़ों के नीचे खड़े होना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि पेड़ बिजली को जल्दी आकर्षित करते हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कड़कती बिजली के दौरान पक्के मकानों की शरण लें और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर बांधें।





