बालोद में जल संकट के बीच ‘पानी की डकैती’: इरागुड़ा और लिमोरा नहर में अराजकता, अज्ञात लोगों ने फोड़ी नहर की दीवार, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बालोद में जल संकट के बीच ‘पानी की डकैती’: इरागुड़ा और लिमोरा नहर में अराजकता, अज्ञात लोगों ने फोड़ी नहर की दीवार, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
बालोद | एक तरफ सूरज आग उगल रहा है और छत्तीसगढ़ का पारा 45 डिग्री के पार पहुँच रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के इरागुड़ा और लिमोरा क्षेत्र में पानी की बर्बादी का एक खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। भीषण गर्मी में जब एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा है, तब कुछ अज्ञात तत्वों द्वारा नहर की नालियों को तोड़कर पानी को अवैध रूप से डायवर्ट किया जा रहा है।

सिस्टम की नींद और ‘पानी माफिया’ का खेल
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, नहर विभाग की लापरवाही का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व रात के अंधेरे में नहर की मेढ़ और नालियों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। इससे मुख्य नहर का पानी खेतों की प्यास बुझाने के बजाय व्यर्थ बह रहा है या फिर रसूखदारों के निजी फायदे के लिए मोड़ा जा रहा है।
प्रमुख बिंदु: क्यों है यह गंभीर स्थिति?
सुरक्षा का अभाव: इतनी बड़ी सिंचाई व्यवस्था होने के बावजूद मौके पर न तो कोई गार्ड है और न ही विभाग की कोई गश्त टीम।
सैकड़ों किसान प्रभावित: नहर टूटने से टेल एरिया (अंतिम छोर) के किसानों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है, जिससे उनकी खड़ी फसलें सूखने की कगार पर हैं।
प्रशासनिक मौन: बार-बार शिकायत के बावजूद विभाग ने अब तक न तो अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई है और न ही नहर की मरम्मत के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
“भीषण गर्मी में पानी की यह बर्बादी किसी अपराध से कम नहीं है। अगर समय रहते नहर की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों के बीच जल-संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।”
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
फिलहाल विभाग के पास ‘जांच का भरोसा’ देने के अलावा कोई ठोस जवाब नहीं है। ग्रामीण अब कलेक्टर और जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि तत्काल पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत कर पानी की चोरी रोकी जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘जल डकैती’ को रोकने के लिए जागता है या फिर इरागुड़ा-लिमोरा के किसान इस गर्मी में प्यासे ही रह जाएंगे।





