छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से: 2 लाख करोड़ के बजट और धर्मांतरण विरोधी कानून पर टिकीं निगाहें
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से: 2 लाख करोड़ के बजट और धर्मांतरण विरोधी कानून पर टिकीं निगाहें
रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार का आगामी बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस सत्र को लेकर भारी उत्साह और गहमागहमी है, क्योंकि साय सरकार न केवल अपना पूर्ण बजट पेश करेगी, बल्कि कई कड़े विधायी कदम भी उठा सकती है। छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय के अनुसार, 20 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी।
चुनावी वादों और विकास पर केंद्रित होगा बजट
सत्र के दूसरे दिन, यानी 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन में राज्य का वार्षिक बजट पेश करेंगे। जानकारों का अनुमान है कि इस बार बजट का आकार 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। इस ‘विजन डॉक्यूमेंट’ में युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा व स्वावलंबन और किसानों की समृद्धि के लिए बड़ी योजनाओं की घोषणा होने की पूरी संभावना है।
धर्मांतरण विरोधी विधेयक ला सकती है सरकार
इस सत्र का सबसे चर्चित विषय मंतातरण (धर्मांतरण) विरोधी विधेयक रहने वाला है। चर्चा है कि सरकार राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए एक कड़ा कानून लाने की तैयारी में है। यदि यह विधेयक पटल पर रखा जाता है, तो सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
रणनीति बनाने में जुटे दिग्गज
सत्र के दौरान सदन में एक-दूसरे को घेरने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कमर कस ली है:
कांग्रेस की तैयारी: नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने 23 फरवरी को शाम 4 बजे राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज मौजूद रहेंगे।
भाजपा की रणनीति: सत्तापक्ष ने भी उसी दिन अपने विधायक दल की बैठक बुलाई है, ताकि विपक्ष के सवालों का मजबूती से जवाब दिया जा सके और विधायी कार्यों को सुचारू रूप से निपटाया जा सके।
सत्र के मुख्य आकर्षण
सवालों की बौछार: विधानसभा में अब तक 1,000 से अधिक प्रश्न लगाए जा चुके हैं, जो जनहित के मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी का संकेत दे रहे हैं।
महत्वपूर्ण विधेयक: धर्मांतरण कानून के अलावा आधा दर्जन से अधिक अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों के पेश होने की उम्मीद है।
यह सत्र राज्य की भविष्य की दिशा और साय सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने वाला साबित होगा।












