सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में शवों को कब्र से निकालने पर अंतरिम रोक, ग्राम सभाओं को मिला धर्मांतरण रोकने का अधिकार

 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में शवों को कब्र से निकालने पर अंतरिम रोक, ग्राम सभाओं को मिला धर्मांतरण रोकने का अधिकार

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

 

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में शवों को कब्र से निकालने पर अंतरिम रोक, ग्राम सभाओं को मिला धर्मांतरण रोकने का अधिकार

नई दिल्ली/रायपुर: सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विवादों पर हस्तक्षेप करते हुए दो अलग-अलग महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं। कोर्ट ने जहां एक ओर आदिवासी ईसाइयों के शवों को कब्र से जबरन बाहर निकालने पर रोक लगा दी है, वहीं दूसरी ओर ‘पेसा’ (PESA) कानून के तहत ग्राम सभाओं द्वारा धर्मांतरण करने वालों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को भी अप्रत्यक्ष रूप से मान्य किया है।

1. शवों को बाहर निकालने पर अंतरिम रोक (18 फरवरी 2026)

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है।

कोर्ट का आदेश: अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ के गांवों में दफनाए गए आदिवासी ईसाइयों के शवों को अगली सुनवाई तक कब्र से बाहर नहीं निकाला जाएगा।

याचिका का आधार: याचिकाकर्ताओं (छत्तीसगढ़ एसोसिएशन फॉर जस्टिस एंड इक्वालिटी) ने आरोप लगाया था कि बस्तर और कांकेर जैसे जिलों में आदिवासी ईसाइयों को उनके परिजनों के शव गांव की सीमा में दफनाने नहीं दिए जा रहे हैं और जो दफनाए जा चुके हैं, उन्हें जबरन बाहर निकाला जा रहा है।

संवैधानिक गरिमा: कोर्ट ने इसे मानवीय गरिमा (अनुच्छेद 21) और धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का उल्लंघन माना है।

2. ग्राम सभाओं के अधिकारों पर मुहर (16 फरवरी 2026)

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें ग्राम सभाओं द्वारा बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर रोक को सही ठहराया गया था।

पेसा कानून का हवाला: कोर्ट ने माना कि ‘पेसा’ कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा करने का अधिकार है।

धर्मांतरण पर रोक: कई ग्राम सभाओं ने होर्डिंग्स लगाए थे कि “बिना अनुमति बाहरी पादरियों और धर्मांतरण कराने वालों का प्रवेश वर्जित है।” कोर्ट ने कहा कि जबरन या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए ग्राम सभाएं ये कदम उठा सकती हैं।

अधिकार क्षेत्र: बेंच ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे इस मामले में सीधे कोर्ट आने के बजाय संबंधित वैधानिक प्राधिकारी या ग्राम सभा के समक्ष अपनी बात रखें।

राज्य सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने शवों को बाहर निकालने के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ग्राम सभाओं को अपने गांवों की परंपराओं की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।