न्याय की जीत: दुर्ग के अधिवक्ता सौरभ पोद्दार यौन शोषण के आरोपों से ससम्मान बरी, न्यायालय ने सुनाया ‘ऐतिहासिक’ फैसला

 न्याय की जीत: दुर्ग के अधिवक्ता सौरभ पोद्दार यौन शोषण के आरोपों से ससम्मान बरी, न्यायालय ने सुनाया ‘ऐतिहासिक’ फैसला

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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न्याय की जीत: दुर्ग के अधिवक्ता सौरभ पोद्दार यौन शोषण के आरोपों से ससम्मान बरी, न्यायालय ने सुनाया ‘ऐतिहासिक’ फैसला

 

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से न्याय जगत की एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने अधिवक्ता सौरभ पोद्दार पर लगे यौन शोषण के गंभीर आरोपों को निराधार पाते हुए उन्हें ससम्मान दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (F.T.C.) अवध किशोर की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और तथ्यों के गहन परीक्षण के बाद यह बड़ा फैसला सुनाया।

 

क्या था पूरा मामला?

दिसंबर 2022 में न्यायालय परिसर में ही टाइपिस्ट के रूप में कार्यरत एक महिला ने अधिवक्ता सौरभ पोद्दार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि फरवरी 2019 में आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने सौरभ पोद्दार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (2)(n), 506-B और 509-B के तहत मामला दर्ज किया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी और फैसला

मामले की लंबी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। न्यायाधीश अवध किशोर ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और केस की परिस्थितियों का बारीकी से विश्लेषण किया। न्यायालय ने अपने फैसले में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को आधार बनाया:

साक्ष्यों का अभाव: अभियोजन पक्ष न्यायालय के समक्ष ऐसे ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा जो आरोपों की पुष्टि कर सकें।

गवाहों के बयानों में विरोधाभास: गवाहों के बयानों में विसंगतियां पाई गईं, जिससे मामला संदेह के घेरे में आ गया।

कानूनी परीक्षण: अदालत ने पाया कि लगाए गए आरोप कानून की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं।

सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। परिणामस्वरूप, अधिवक्ता सौरभ पोद्दार को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।

अधिवक्ता जगत में हर्ष की लहर

इस फैसले के आने के बाद सौरभ पोद्दार और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला झूठे आरोपों के खिलाफ एक नजीर साबित होगा और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर समाज के विश्वास को और मजबूत करेगा।

इस ‘ऐतिहासिक’ निर्णय ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं।