बस्तर में माओवाद की कमर टूटी: अमित शाह के दौरे से पहले 51 नक्सलियों का सरेंडर, 1.61 करोड़ का था इनाम
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बस्तर में माओवाद की कमर टूटी: अमित शाह के दौरे से पहले 51 नक्सलियों का सरेंडर, 1.61 करोड़ का था इनाम
जगदलपुर/सुकमा/बीजापुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर प्रवास से ठीक पहले छत्तीसगढ़ के दक्षिणी इलाके में माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। सुकमा और बीजापुर जिलों में पिछले 24 घंटों के भीतर कुल 51 सक्रिय माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1 करोड़ 61 लाख रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था।
21 खूंखार नक्सलियों का आत्मसमर्पण
सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली, जहाँ 21 खूंखार नक्सलियों ने बस्तर आईजी सुंदरराज पी. और एसपी किरण चव्हाण के समक्ष सरेंडर किया। इन नक्सलियों पर शासन द्वारा 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस समर्पण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि नक्सलियों ने केवल आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि अपने साथ हथियार भी पुलिस को सौंपे। ये सभी नक्सली बस्तर में हुई कई बड़ी और घातक घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं।
बीजापुर: 20 महिलाओं समेत 30 कैडरों ने छोड़ा संगठन
बीजापुर जिले में भी शनिवार को माओवादियों के ‘साउथ सब जोनल ब्यूरो’ को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यहाँ 30 माओवादी कैडरों (जिनमें 20 महिलाएँ और 10 पुरुष शामिल हैं) ने पुलिस महानिरीक्षक (केरिपु) बीएस नेगी और एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव के सामने हथियार डाले। इन पर 85 लाख रुपये का इनाम था।
सरेंडर करने वालों में कंपनी नंबर 2 और 7 के पीपीसीएम, एरिया कमेटी सदस्य और जनताना सरकार के अध्यक्ष जैसे प्रभावशाली पदों पर तैनात माओवादी शामिल हैं। इन्होंने कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक भी सुरक्षा बलों को सुपुर्द किए।
‘पूना मारगेम’ नीति का दिख रहा असर
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुरक्षा कैंपों की बढ़ती संख्या और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने माओवादियों के आधार क्षेत्र को सिकोड़ दिया है। उन्होंने इसे संगठन के आंतरिक बिखराव का स्पष्ट संकेत बताया।
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि शासन की ‘पूना मारगेम’ (नई सुबह) नीति से प्रभावित होकर नक्सली लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक कैडर को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।











