छत्तीसगढ़ में ‘प्लास्टिक वाली शराब’ पर छिड़ा विवाद; मंत्री नेताम बोले- ‘अनुभव लेकर बताऊंगा कि कैंसर होता है या नहीं’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में ‘प्लास्टिक वाली शराब’ पर छिड़ा विवाद; मंत्री नेताम बोले- ‘अनुभव लेकर बताऊंगा कि कैंसर होता है या नहीं’
रायपुर/:छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नई आबकारी नीति के तहत कांच के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने के फैसले ने राज्य में एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के एक “बेतुके” बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।
क्या है मंत्री का विवादित बयान?
दुर्ग जिले में आयोजित एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान पत्रकारों ने जब मंत्री नेताम से पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उन चिंताओं पर सवाल किया कि प्लास्टिक की बोतलों में रखी शराब से कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है, तो उन्होंने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया।
मंत्री ने हंसते हुए कहा, “मुझे इस बात का अनुभव नहीं है कि प्लास्टिक की बोतल में शराब पीने से कैंसर होता है या कांच की बोतल में। पहले मैं इसका अनुभव लूंगा, फिर जानकारी साझा करूंगा।” उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी विपक्षी दलों द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है।
नई आबकारी नीति और सरकार का तर्क
छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई शराब नीति को मंजूरी दी है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
कांच से प्लास्टिक की ओर: अब शराब की पैकेजिंग कांच की बोतलों के स्थान पर प्लास्टिक की बोतलों में की जाएगी।
वित्तीय नुकसान को कम करना: सरकार का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल भारी आर्थिक नुकसान होता है। प्लास्टिक की बोतलों से टूट-फूट कम होगी और परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) व हैंडलिंग आसान हो जाएगी।
सुरक्षा: कांच के टुकड़ों से कर्मचारियों और ग्राहकों को होने वाली चोटों के जोखिम को कम करना भी एक उद्देश्य है।
विरोध की वजह
पर्यावरणविदों और डॉक्टरों का मानना है कि प्लास्टिक (विशेषकर खराब गुणवत्ता वाले) में अल्कोहल रखने से केमिकल लीचिंग (पदार्थों का घुलना) हो सकती है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और भविष्य में कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है। साथ ही, प्लास्टिक के कचरे से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने की भी चिंता जताई जा रही है।
फिलहाल, मंत्री नेताम के इस बयान ने सरकार की मंशा और स्वास्थ्य के प्रति उसकी संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।












