प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर किसान ने पिया फिनाइल; भारतमाला प्रोजेक्ट का मुआवजा न मिलना और धान खरीदी में धांधली बनी वजह

 प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर किसान ने पिया फिनाइल; भारतमाला प्रोजेक्ट का मुआवजा न मिलना और धान खरीदी में धांधली बनी वजह

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर किसान ने पिया फिनाइल; भारतमाला प्रोजेक्ट का मुआवजा न मिलना और धान खरीदी में धांधली बनी वजह

जांजगीर-चांपा (अकलतरा): छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड से एक हृदय विदारक मामला सामने आया है, जहाँ ग्राम सांकर के एक संपन्न किसान अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रशासनिक अव्यवस्थाओं से तंग आकर फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। किसान ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक वीडियो जारी कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल, समय रहते अस्पताल पहुँचाने के कारण उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

 

धान बेचने के लिए भटकता रहा किसान, नहीं मिला टोकन

पीड़ित किसान अनुराग सिंह ठाकुर के अनुसार, वे क्षेत्र के बड़े किसानों में शुमार हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से उन्हें फसल बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष भी धान न बिक पाने के कारण उन्हें औने-पौने दाम पर दलालों को फसल बेचनी पड़ी थी। इस वर्ष उम्मीद थी कि नुकसान की भरपाई होगी, लेकिन अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी उन्हें टोकन जारी नहीं किया गया। उनका 150 क्विंटल से अधिक धान अब भी उपार्जन केंद्र में नहीं बिक पाया है।

भारतमाला परियोजना: जमीन गई पर नहीं मिला मुआवजा

किसान की व्यथा केवल धान तक सीमित नहीं है। भारतमाला परियोजना के तहत उनकी भूमि सिक्स लेन सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। किसान का आरोप है कि प्रशासनिक कूटरचना और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से उन्हें अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ ने उन्हें इस जानलेवा कदम के लिए मजबूर कर दिया।

‘भौतिक सत्यापन’ के नाम पर किसानों के साथ छल का आरोप

अनुराग सिंह ने वीडियो में आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर समर्थन मूल्य की राशि बचाने के लिए किसानों को परेशान कर रहा है। ‘भौतिक सत्यापन’ के नाम पर कई किसानों से जबरन रकबा समर्पण कराया गया, जिससे सैकड़ों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर धान खरीदी की जमीनी हकीकत और सरकारी दावों के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसान संगठनों ने इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित किसान को तुरंत मुआवजा व धान बेचने की अनुमति देने की मांग की है।