दुर्ग: वेतन कटौती से टूटी सेल्समैन की हिम्मत, आर्थिक तंगी के चलते ज़हर खाकर दी जान देने की कोशिश

 दुर्ग: वेतन कटौती से टूटी सेल्समैन की हिम्मत, आर्थिक तंगी के चलते ज़हर खाकर दी जान देने की कोशिश

दुर्ग: वेतन कटौती से टूटी सेल्समैन की हिम्मत, आर्थिक तंगी के चलते ज़हर खाकर दी जान देने की कोशिश

दुर्ग (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गंजपारा स्थित सरकारी शराब दुकान में कार्यरत एक सेल्समैन ने कथित तौर पर वेतन में भारी कटौती और बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण आत्मघाती कदम उठा लिया है. सेल्समैन चेतन साहू ने ड्यूटी के बाद घर लौटकर ज़हर का सेवन कर लिया. फिलहाल उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है और वे शहर के एक निजी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं.

महीने भर की मेहनत के बदले मिले मात्र ₹7,000

परिजनों के अनुसार, चेतन पिछले कुछ महीनों से वेतन में हो रही निरंतर कटौती को लेकर गहरे मानसिक तनाव में थे. उनकी माता सरोज साहू ने बताया कि ड्यूटी से लौटने के बाद चेतन को लगातार उल्टियां हो रही थीं. पूछने पर उसने खुलासा किया कि इस महीने फिर से सैलरी कटने के बाद उसके खाते में मात्र 7,000 रुपये ही आए हैं. चेतन के कंधों पर तीन छोटे बच्चों और परिवार के पालन-पोषण की ज़िम्मेदारी थी, जो इस मामूली रकम में पूरी होना असंभव थी. दोस्तों के मुताबिक, उस पर करीब ₹9,000 की मासिक किस्त (EMI) का बोझ भी था.

350+ कर्मचारियों पर संकट, ‘डैमरेज’ के नाम पर वसूली का आरोप

यह समस्या केवल गंजपारा की दुकान तक सीमित नहीं है. दुर्ग जिले की 63 शराब दुकानों में काम करने वाले 350 से अधिक कर्मचारी इस वेतन संकट से जूझ रहे हैं. कर्मचारियों ने सीधे तौर पर प्लेसमेंट एजेंसी BIS पर गंभीर आरोप लगाए हैं:

अघोषित कटौती: सेल्समैन के वेतन से ₹7,000–₹8,000, सुपरवाइज़र के ₹10,000 और मल्टी-टास्क स्टाफ के ₹5,000 तक काटे जा रहे हैं.

डैमरेज चार्ज का बहाना: आरोप है कि कंपनी ‘डैमरेज चार्ज’ (माल की क्षति या देरी का शुल्क) के नाम पर यह वसूली कर रही है, जबकि सरकार की ओर से पूरा भुगतान एजेंसी को किया जा रहा है.

पारदर्शिता का अभाव: कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कटौती का कोई ठोस कारण या लिखित विवरण नहीं दिया जाता, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है.

प्रशासनिक जाँच और बयान

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं. दुर्ग तहसीलदार कुलेश्वर दास खुटे ने अस्पताल पहुँचकर चेतन साहू का मृत्यु-पूर्व बयान (Dying Declaration) दर्ज किया है. पुलिस अब इस मामले में प्लेसमेंट एजेंसी की भूमिका और वेतन कटौती के कानूनी पहलुओं की जाँच कर रही है.

जिले भर के शराब दुकान कर्मचारियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है और उन्होंने वेतन प्रणाली में तुरंत पारदर्शिता लाने की माँग की है.