रायगढ़: धान खरीदी में टोकन की समस्या को लेकर भड़के किसान, पूर्व मंत्री उमेश पटेल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट का घेराव
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
*****************************
रायगढ़: धान खरीदी में टोकन की समस्या को लेकर भड़के किसान, पूर्व मंत्री उमेश पटेल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट का घेराव
रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में धान खरीदी के अंतिम दौर में किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। धान केंद्रों में टोकन नहीं कटने की समस्या को लेकर आज पूर्व मंत्री व खरसिया विधायक उमेश पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहाँ उन्होंने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर किसानों के लिए तत्काल टोकन जारी करने की मांग की।
भटकने को मजबूर हैं किसान
ज्ञापन में बताया गया कि धान खरीदी केंद्रों में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर पटवारी, तहसीलदार और सोसायटियों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। सत्यापन फॉर्म जमा करने के बावजूद टोकन जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे किसानों का धान खुले खलिहानों में पड़ा हुआ है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन, कांग्रेस ने दी चेतावनी
पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि धान खरीदी के लिए अब मुश्किल से 9 दिन बचे हैं। खोखरा, ननसिया, नंदेली समेत कई गांवों के किसान अभी भी टोकन का इंतजार कर रहे हैं, जबकि केंद्रों के प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें टोकन काटने से मना किया गया है। उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार रायगढ़ जिले को धान खरीदी कम करने का मॉडल बनाना चाहती है।
विधायक पटेल ने बताया कि इस संबंध में नोडल अधिकारी से चर्चा हुई है, जिन्होंने शाम तक समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। पटेल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आज शाम तक टोकन की समस्या दूर नहीं हुई, तो प्रभावित किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
प्रदेश भर में बनी है स्थिति
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह समस्या केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में किसान परेशान हैं। रायगढ़ में स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि यहाँ प्रशासन जानबूझकर धान खरीदी की गति को धीमा कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन के आश्वासन के बाद किसानों को राहत मिलती है या उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।












