बालोद में प्रथम नेशनल जंबूरी का भव्य समापन: डिप्टी सीएम अरुण साव बोले— ‘युवा ही विकसित भारत के निर्माण में बनेंगे मील का पत्थर’

 बालोद में प्रथम नेशनल जंबूरी का भव्य समापन: डिप्टी सीएम अरुण साव बोले— ‘युवा ही विकसित भारत के निर्माण में बनेंगे मील का पत्थर’

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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बालोद में प्रथम नेशनल जंबूरी का भव्य समापन: डिप्टी सीएम अरुण साव बोले— ‘युवा ही विकसित भारत के निर्माण में बनेंगे मील का पत्थर’

बालोद, छत्तीसगढ़,छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आयोजित पांच दिवसीय प्रथम नेशनल जंबूरी का आज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन हो गया। समापन समारोह (वैलीडक्टरी फंक्शन) में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।

युवा शक्ति ही देश का भविष्य: अरुण साव

समारोह को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि युवा भारत के निर्माण में रोवर-रेंजर्स मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास भरने पर जोर देते हुए कहा, “निराश और परेशान युवा न खुद आगे बढ़ सकता है और न ही परिवार या देश को आगे बढ़ा सकता है। युवाओं को ऊर्जा और अटूट आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। आप यहाँ से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को लेकर जाएं और उन्हें समाज में स्थापित करें।” उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया की उम्मीदें भारत पर टिकी हैं और भारत का युवा ही विश्व का नेतृत्व करेगा।

‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का गूंजा नारा

उपमुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर्स को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे यहाँ से एक सुखद अनुभव लेकर जाएं और पूरे देश में यह संदेश दें कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” है।

आयोजन ने छोड़ी अमिट छाप: गजेंद्र यादव

मंत्री गजेंद्र यादव ने आयोजन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि बालोद का सौभाग्य है कि यहाँ देशभर के बच्चों का संगम हुआ। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इस आयोजन ने लोगों के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

जंबूरी के मुख्य आकर्षण और आंकड़े:

सहभागिता: इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से 13,000 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया। स्टाफ और प्रशासन को मिलाकर कुल संख्या लगभग 20,000 रही।

प्रमुख राज्य: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से ही 4,000 बच्चे शामिल हुए, जबकि बाहरी राज्यों में सबसे बड़ी संख्या राजस्थान (लगभग 1200 छात्र) की रही।

अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: जंबूरी में न केवल भारत बल्कि श्रीलंका और इटली के बच्चों ने भी शिरकत की।

गतिविधियां: 4 दिनों तक चले इस शिविर में बच्चों ने कैंपिंग, घुड़सवारी और विभिन्न साहसिक गतिविधियों में भाग लिया।

विदाई की तैयारी:

समापन के बाद सभी प्रतिभागी अपने गंतव्य की ओर लौटने लगे हैं। प्रबंधन द्वारा बच्चों को रेलवे स्टेशन और उनके राज्यों तक भेजने के लिए बसों और अन्य वाहनों की पुख्ता व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हुई इस नेशनल जंबूरी ने सांस्कृतिक एकता और युवा सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है।