रायगढ़ में ‘डॉग बिरयानी’ पर सियासी घमासान: नसबंदी के बाद कुत्तों को बिरयानी खिलाने की योजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

 रायगढ़ में ‘डॉग बिरयानी’ पर सियासी घमासान: नसबंदी के बाद कुत्तों को बिरयानी खिलाने की योजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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रायगढ़ में ‘डॉग बिरयानी’ पर सियासी घमासान: नसबंदी के बाद कुत्तों को बिरयानी खिलाने की योजना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

रायगढ़ | छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा शुरू की गई एक अनूठी पहल अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। नगर निगम द्वारा नसबंदी (Sterilization) के बाद आवारा कुत्तों को ‘बिरयानी’ (चिकन-चावल) परोसने के प्रस्ताव ने सत्ता पक्ष और विपक्षी दल के बीच तीखी बयानबाजी शुरू कर दी है।

विवाद की जड़ क्या है?

रायगढ़ नगर निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक निजी एजेंसी के साथ करार किया है। इस अभियान के तहत कुत्तों को पकड़कर उनका ऑपरेशन किया जा रहा है। विवाद तब शुरू हुआ जब संबंधित विभाग ने सर्जरी के बाद कुत्तों की रिकवरी के लिए उन्हें ‘हाइजीनिक चिकन बिरयानी’ खिलाने का निर्णय लिया। प्रशासन का तर्क है कि सर्जरी के बाद कुत्तों को उच्च प्रोटीन वाले भोजन की आवश्यकता होती है, जिसके लिए बिरयानी एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है।

विपक्ष के आरोप: “जनता के पैसे की बर्बादी”

विपक्षी दल ने इस योजना को ‘फिजूलखर्ची’ और ‘भ्रष्टाचार’ का जरिया बताया है। विपक्ष के स्थानीय नेताओं का कहना है:

अमानवीय प्राथमिकताएं: विपक्ष ने आरोप लगाया कि शहर के कई गरीब इलाकों में लोग कुपोषण से जूझ रहे हैं, जबकि प्रशासन कुत्तों को बिरयानी खिलाने में बजट खर्च कर रहा है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरोध: कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और विपक्षी पार्षदों ने ‘बिरयानी’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का मांस वितरण अनुचित है।

सत्ता पक्ष की सफाई: “यह केवल वैज्ञानिक आहार है”

विवाद बढ़ता देख सत्ता पक्ष के नेताओं और महापौर ने स्पष्ट किया है कि यह कोई ‘दावत’ नहीं बल्कि चिकित्सा प्रक्रिया का हिस्सा है।

प्रोटीन डाइट: सरकार का कहना है कि पशु चिकित्सकों की सलाह पर कुत्तों को रिकवरी के लिए उबला हुआ चिकन और चावल दिया जा रहा है, जिसे बोलचाल की भाषा में ‘बिरयानी’ कह दिया गया।

भ्रष्टाचार से इनकार: सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष बेवजह इस मुद्दे को तूल दे रहा है ताकि नसबंदी जैसे महत्वपूर्ण अभियान में बाधा डाली जा सके।

जनता की प्रतिक्रिया

रायगढ़ के नागरिक इस मुद्दे पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग इसे ‘पशु अधिकार’ (Animal Rights) के पक्ष में एक मानवीय कदम बता रहा है, तो दूसरा वर्ग नगर निगम के खाली खजाने और शहर की खराब सड़कों का हवाला देकर प्रशासन को घेर रहा है।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल, विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस योजना की समीक्षा के आदेश दिए हैं। विपक्षी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि इस ‘बिरयानी बजट’ को तत्काल नहीं रोका गया, तो वे नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे।