जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की मानवीय पहल: भिक्षाटन छोड़ अब स्कूल जाएगी 12 वर्षीय बालिका, छात्रावास में मिला प्रवेश
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की मानवीय पहल: भिक्षाटन छोड़ अब स्कूल जाएगी 12 वर्षीय बालिका, छात्रावास में मिला प्रवेश
दुर्ग, 4 जनवरी 2026,छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की प्रेरणा और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में न्याय व्यवस्था का एक अत्यंत मानवीय चेहरा सामने आया है। प्राधिकरण ने तत्परता दिखाते हुए एक 12 वर्षीय जरूरतमंद बालिका को भिक्षाटन के दलदल से निकालकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘संजीवनी बालिका आवासीय छात्रावास’ दुर्ग में प्रवेश दिलाया है।
भिक्षाटन के बजाय शिक्षा को चुना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्ग के पोटिया (थाना-पुलगाँव) निवासी एक बालिका की माता मानसिक रूप से कमजोर है, जो अपनी बेटी को भी साथ में भिक्षाटन (भीख मांगने) के लिए ले जाती थी। बालिका स्वयं भिक्षाटन नहीं करना चाहती थी और उसकी रुचि पढ़ाई में थी। जैसे ही यह मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में आया, अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।
विधिक सेवा प्राधिकरण की निर्णायक भूमिका
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘बालकों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं योजना, 2024’ के तहत कार्रवाई करते हुए, प्राधिकरण ने संबंधित विभागों और छात्रावास अधीक्षक से तत्काल समन्वय स्थापित किया। आवश्यक दस्तावेजी औपचारिकताओं को पूरा कर बालिका का नियमतः छात्रावास में दाखिला सुनिश्चित कराया गया।
संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण
इस पूरी प्रक्रिया में थाना जामुल के पैरालीगल वालेंटियर की भूमिका सराहनीय रही। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में किए गए इस कार्य से न केवल एक बच्ची का भविष्य सुरक्षित हुआ है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के प्रति न्यायपालिका की संवेदनशीलता भी प्रकट हुई है। इस पहल से सरकार की शिक्षा संबंधी कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर मजबूती मिली है।
अधिक सहायता या विधिक जानकारी के लिए आप छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (CGSLSA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।









