धड़ल्ले से जारी है प्रतिबंधित कौहा (अर्जुन) लकड़ी का अवैध कारोबार, जालबांधा में वन विभाग की नाक के नीचे ‘लकड़ी मिलर’ के हौसले बुलंद
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
*****************************
धड़ल्ले से जारी है प्रतिबंधित कौहा (अर्जुन) लकड़ी का अवैध कारोबार, जालबांधा में वन विभाग की नाक के नीचे ‘लकड़ी मिलर’ के हौसले बुलंद
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: जिले के जालबांधा क्षेत्र में वन संपदा की खुलेआम लूट मची हुई है। शासन द्वारा प्रतिबंधित कौहा (अर्जुन) की लकड़ी का अवैध व्यापार वन विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे फल-फूल रहा है। ताजा मामले में स्थानीय लकड़ी मिलर इकेश्वर वर्मा पर नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित लकड़ियों की अवैध कटाई और परिवहन के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद कौहा लकड़ी का अवैध व्यापार जारी
यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कौहा (अर्जुन) वृक्ष को इसके औषधीय महत्व और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद, जालबांधा क्षेत्र के गांवों से इस बेशकीमती लकड़ी को काटकर खपाने की खबरें आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, बिना किसी खौफ के ग्रामीणों और बिचौलियों के माध्यम से इन लकड़ियों को डिपो और मिलों तक पहुँचाया जा रहा है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
चिंता की बात यह है कि वन विभाग के अमले को इसकी जानकारी है या नहीं, या फिर इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि लकड़ी का यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पर्यावरण को नुकसान
अर्जुन के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ रहा है। यदि जल्द ही इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो क्षेत्र से कौहा के वृक्षों की संख्या में कमी आ सकती है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।
जानकारी के लिए:
वन विभाग की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना आप छत्तीसगढ़ वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क नंबरों पर दे सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन से संपर्क के लिए खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला पोर्टल का उपयोग करें।





