भिलाई-दुर्ग में कांग्रेस का संगठनात्मक संतुलन: मुकेश चंद्राकर, राकेश ठाकुर बरकरार; धीरज बाकलीवाल नए जिलाध्यक्ष
प्राइम सी 24 न्यूज से दुर्ग संभाग ब्यूरो चीफ जावेद खान की रिपोर्ट
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भिलाई-दुर्ग में कांग्रेस का संगठनात्मक संतुलन: मुकेश चंद्राकर, राकेश ठाकुर बरकरार; धीरज बाकलीवाल नए जिलाध्यक्ष
दुर्ग-भिलाई,अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा शुक्रवार देर रात जारी की गई जिलाध्यक्षों की सूची ने भिलाई-दुर्ग क्षेत्र की कांग्रेस राजनीति में नई ऊर्जा और रणनीतिक संतुलन का संचार किया है। इस महत्वपूर्ण घोषणा में, एआईसीसी ने अनुभवी नेतृत्व और स्थानीय समीकरणों को साधते हुए तीन प्रमुख नियुक्तियां की हैं।
भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पद पर मुकेश चंद्राकर और दुर्ग ग्रामीण के लिए राकेश ठाकुर को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है। यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी हाईकमान उनके पिछले कार्यकाल के संगठनात्मक कार्यों, बूथ-स्तरीय नेटवर्क को मजबूत करने की क्षमता और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखने के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट है।
दूसरी ओर, दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल का चयन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। शहर की राजनीति में युवा, लोकप्रिय और सहज छवि वाले बाकलीवाल जनता और संगठन दोनों के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं। दुर्ग शहर में कांग्रेस को एक नए उत्साह और नेतृत्व की आवश्यकता थी, जिसे पूरा करने के लिए उनकी नियुक्ति की गई है।
निकाय चुनावों और 2028 विधानसभा की तैयारी
दुर्ग-भिलाई को छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्रीय गढ़ माना जाता है, जहां से पार्टी को दो मुख्यमंत्री और कई प्रमुख मंत्री मिले हैं। ये नियुक्तियां अगले साल के अंत में होने वाले निगम (भिलाई, रिसाली और चरोदा) चुनावों और 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य संगठन विस्तार करना, संभावित अंतर्कलह को कम करना और एकजुट चुनावी रणनीति बनाना है।
प्रोविजनल पीरियड और प्रदर्शन की चुनौती
जारी आदेश के अनुसार, नवनियुक्त तीनों जिलाध्यक्ष पहले तीन महीने की ‘प्रोविजनल पीरियड’ (परिवीक्षा अवधि) पर रहेंगे। इस दौरान उनके कामकाज की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि संगठन उनके प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं होता है, तो रिप्लेसमेंट भी संभव है। ऐसे में, इन तीनों नेताओं को अपनी संगठनात्मक क्षमता और सक्रियता से पार्टी हाईकमान को संतुष्ट करने की बड़ी चुनौती का सामना करना होगा।








