महासमुंद में धान खरीदी अव्यवस्था: 7,000 से अधिक किसान पंजीयन और रकबा सुधार के लिए परेशान; आंदोलन की चेतावनी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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महासमुंद में धान खरीदी अव्यवस्था: 7,000 से अधिक किसान पंजीयन और रकबा सुधार के लिए परेशान; आंदोलन की चेतावनी
महासमुंद, । महासमुंद जिले में धान खरीदी शुरू हुए 13 दिन बीत जाने के बावजूद, प्रशासनिक लापरवाही और सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण हजारों किसान अब भी पंजीयन (registration) और रकबा (area) सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। खरीदी के लिए पंजीयन की समय-सीमा दो दिन बाद समाप्त हो रही है, जबकि 7,455 किसानों का पंजीयन लंबित है।
प्रशासन द्वारा पंजीयन की तिथि को 5 दिन के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है। किसान तहसील कार्यालयों और सोसायटियों में लंबी लाइनों में खड़े होकर अपनी जमीन का रकबा ठीक कराने की कोशिश कर रहे हैं, जो भौतिक सत्यापन और सैटेलाइट सर्वेक्षण के बाद कम हो गया था।
समस्या की जड़: सैटेलाइट सत्यापन और सॉफ्टवेयर त्रुटियां
खरीदी से पहले किए गए सत्यापन में 40 हजार से अधिक किसानों के धान का रकबा कम दिखाया गया था। जिला नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने स्वीकार किया कि सैटेलाइट डेटा और सॉफ्टवेयर में खामियों के कारण दिक्कतें आ रही थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है।
बैहाडीह, कोकनाझर, जोगीडीपा सहित 18 गांवों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। इन इलाकों में कई किसानों का एक से दो एकड़ रकबा मॉड्यूल में शामिल नहीं हो पाया है। अधिकारियों के पास जाने पर किसानों को सॉफ्टवेयर की खामियां बताकर वापस भेज दिया जाता है।
कर्ज चुकाने के लिए औने-पौने दाम में धान बेचने पर मजबूर किसान
सुधार में हो रही देरी से हताश किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों में धान बेचने को मजबूर हैं। बैहाडीह के किसान तुकाराम ध्रुव ने बताया कि प्राइवेट दुकान का कर्ज चुकाने के लिए उन्हें 1500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान बेचना पड़ा।
चोरभट्टी के करीब 50 वनग्राम किसानों की समस्या और भी जटिल है, क्योंकि वनभूमि से संबंधित उनकी गिरदावरी रिपोर्ट सॉफ्टवेयर में सबमिट नहीं हो पाई है, जिससे सोसायटी मॉड्यूल में रकबा प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय-सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान कर पंजीयन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे। प्रशासन ने सुधार प्रक्रिया जारी रहने का दावा किया है, लेकिन किसानों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है।








