हॉस्टल में अचानक गूंजी चीखें…तीन बच्चियां एक-एक कर बेहोश, अस्पताल पहुंची तो झाड़-फूंक का ड्रामा शुरू!
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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कवर्धा के रेंगाखार छात्रावास में तीन छात्राएं बेहोश हुईं तो इलाज की जगह झाड़-फूंक कर दी गई. घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अंधविश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कवर्धा।कवर्धा जिले के रेंगाखार जंगल स्थित आदिवासी बालिका छात्रावास में मंगलवार को अचानक तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़ीं. उन्हें जल्द ही रेंगाखार सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां इलाज के दौरान न मेडिकल स्टाफ पर्याप्त मिला और न ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद था. इस घटना ने छात्रावास और स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया. बच्चियों की चीख-पुकार और हालत देखकर छात्रावास के अन्य छात्राओं में डर का माहौल बन गया.
इसी दौरान हैरान करने वाला दृश्य सामने आया, जब इलाज की जगह छात्रावास की एक शिक्षिका ने अस्पताल परिसर में ही अंधविश्वास का सहारा लिया. एक व्यक्ति जमीन पर बैठकर झाड़-फूंक करता दिखा और बाद में बच्चियों को कुछ पिलाते हुए वीडियो में कैद हुआ. स्थानीय युवक ने विरोध किया तो शिक्षिका का जवाब था. ‘दोनों ज़रूरी हैं…’. इस हरकत ने अस्पताल प्रबंधन और शिक्षक दोनों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह स्वास्थ्य सेवाओं में बरती गई बड़ी लापरवाही मानी जा रही है.
डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस
अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक, छात्राओं को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी बल्कि घबराहट के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी. वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में दो डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सहायक आयुक्त ने झाड़-फूंक के आरोपों से इनकार किया है, जबकि बच्चियों को एहतियातन घर भेज दिया गया है. इस पूरी घटना ने रेंगाखार जैसे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और अंधविश्वास पर निर्भरता की कड़वी सच्चाई एक बार फिर सामने ला दी है.





