छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में SDM कार्यालय पर एसीबी ने 1.80 लाख रिश्वत लेते पटवारी सहित दो लोगों रंगे हाथ किया गिरफ्तार

 छत्तीसगढ़ के  जांजगीर-चांपा जिले में SDM कार्यालय पर एसीबी ने 1.80 लाख रिश्वत लेते पटवारी सहित दो लोगों रंगे हाथ किया गिरफ्तार

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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योजना के तहत 30 अक्तूबर को प्रार्थी बुधराम को रिश्वत की रकम 1.80 लाख रुपये के साथ भेजा गया। जैसे ही अमीन पटवारी बिहारी सिंह ने रकम अपने हाथों में ली, उसी समय डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह के नेतृत्व में तैनात टीम ने मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

 

 

बिलासपुर।आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने एसडीएम कार्यालय चांपा के भू-अर्जन शाखा में पदस्थ अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन को एक किसान से 1 लाख 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।

 

 

 

ग्राम रायपुरा जिला सक्ती निवासी किसान बुधराम धीवर ने 16 अक्तूबर को एसीबी इकाई बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी और उसकी बहन के नाम की ग्राम कोसमंदा (जिला जांजगीर) स्थित जमीन नेशनल हाइवे निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके एवज में अगस्त-2025 में एसडीएम कार्यालय चांपा से भू-अर्जन अधिकारी द्वारा उन्हें 35 लाख 64 हजार 99 रुपये मुआवजा राशि के रूप में उनके संयुक्त बैंक खाते में जमा की गई थी।

शिकायत के अनुसार, भुगतान के बाद भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी बिहारी सिंह और आपरेटर राजकुमार देवांगन ने किसान से कहा कि उन्होंने राशि निकलवाने में मदद की है, इसलिए उन्हें 1 लाख 80 हजार रुपये देना होगा। रिश्वत की मांग से परेशान किसान ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई और आरोपियों को रंगेहाथ पकड़वाने की इच्छा जताई।

शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने के बाद एसीबी ने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 30 अक्तूबर को प्रार्थी बुधराम को रिश्वत की रकम 1.80 लाख रुपये के साथ भेजा गया। जैसे ही अमीन पटवारी बिहारी सिंह ने रकम अपने हाथों में ली, उसी समय डीएसपी एसीबी बिलासपुर अजितेश सिंह के नेतृत्व में तैनात टीम ने मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। टीम ने आरोपी बिहारी सिंह से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली है। अचानक हुई इस कार्रवाई से एसडीएम कार्यालय परिसर और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।