बरसात में बढ़ जाती है लक्ष्मण धारा की सुंदरता इस अद्भूत स्थल पर समय गुजारने प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं पर्यटक

 बरसात में बढ़ जाती है लक्ष्मण धारा की सुंदरता इस अद्भूत स्थल पर समय गुजारने प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं पर्यटक

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

 

 

छत्तीसगढ़ को यूं ही प्रकृति का खजाना नहीं कहा जाता

लक्ष्मण धारा.अरपा नदी के उद्गम स्थल से कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित

आने वाले दिनों में यह बनेगा छत्तीसगढ़ की पहचान

 

 

बिलासपुर। अरपा नदी के उद्गम स्थल से कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित लक्ष्मण धारा गौरेला- पेंड्रा- मरवाही जिले का सबसे सुंदर मनामोहक पर्यटन स्थल है। वैसे तो सालभर पर्यटक यहां पहुंचते हैं। लेकिन, बरसात में पर्यटकों की संख्या कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। शनिवार व रविवार को तो सैलानियों की इतनी अधिक भीड़ रहती है कि मेला जैसा माहौल बना रहता है। हालांकि अभी कई प्रकृति प्रेमी इस जगह से अनभिज्ञ है।

 

छत्तीसगढ़ की पहचान

 

 

यहां की सुंदरता और पर्यटकों के बीच लोकप्रियता बढ़ाने के लिए वन विभाग व पर्यटन विभाग दोनों प्रयास कर रहे हैं। कई प्रस्ताव भी बनाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह छत्तीसगढ़ की पहचान भी बनेगा। सुविधा न होने के बाद भी पर्यटक अपने संसाधनों के साथ यहां पहुंचकर सुबह से शाम तक उमंग के बीच गुजारते हैं। आने वाले दिनों में यहां पर्यटकों को जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। इसे इतना लोकप्रिय बनाने की योजना है कि पर्यटक बार- बार सैर करने के लिए पहुंचे। इससे क्षेत्र का विकास भी होगा। कुछ साल पहले पर्यटकों के बीच लोकप्रियता की वजह से लक्ष्मण धारा तक पहुंचने के लिए मुरुम का मार्ग बनाया गया था। सड़क बनने के कारण ही अब पर्यटक की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक बार कोई यह जगह घूम लेता है तो दोबारा परिचितों को लेकर जरुर आता है। प्रकृति का अद्भूत नजारा उन्हें अपनी ओर खींच ले आता है।

 

 

रंग- बिरंगे व चमकदार पत्थर

 

इस जगह की एक खासियत है कि बरसात के सीजन में सेल्फी हो या ग्रुप फोटो बेहद आकर्षक आती है। यहां पहुंचकर मन तरोताजा हो जाता है। रंग- बिरंगे व चमकदार पत्थर करते हैं आकर्षित लक्ष्मण धारा के ऊपरी हिस्से में चट्टान है। जिनके पत्थर पांच रंगों में नजर आते हैं। काला, लाल, नीला, गेंहुआ व कत्थे रंग में चमकते पत्थर पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। ऊपरी हिस्से में जहां से पानी गिरता है और नीचे जहां पर पानी की धार गिरती है, उस जगह की गहराई कितनी है यह आज तक कोई नाप नहीं पाया है। पर्यटकों की भीड़ अधिक होने पर वन अमला उस जगह पर जाने से मना करता है। इसके साथ अब जगह-जगह सतर्कता के बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटनाएं न हो। पहुंचने के लिए ट्रेन व सड़क मार्ग की सुविधा लक्ष्मण धारा पहुंचने के लिए सड़क व रेलमार्ग दोनों की सुविधा है।

 

 

बिलासपुर से 90 किमी की दूरी

 

बिलासपुर से सड़क मार्ग से यहां पहुंचते हैं तो 90 किमी की दूरी पड़ेगी। इसके लिए आपको बिलासपुर से पहले खोडरी रेलवे फाटक जाना होगा। वहां से महज पांच किमी की दूरी पर लक्ष्मण धारा नजर आने लगता है। इस तरह बिलासपुर से सड़क मार्ग पर जाने में 95 किमी की दूरी तय करनी होगी। इसी तरह ट्रेन मार्ग से पहुंचने के लिए इसके लिए आपको खोडरी रेलवे स्टेशन में उतरना होगा। स्टेशन से उतरने के बाद दो किमी की दूरी पर फाटक है, जहां से मुरुम की सड़क नजर आने लगती है। इस रास्ते पर बामुश्किल पांच किमी का फासला तय करना पड़ता है।

वन्य प्राणी

 

वन्य प्राणी करते हैं विचरण इस जगह को लेकर वन विभाग बेहद संवेदनशील है। इसकी वजह वन्य प्राणियों का विचरण है। सालभर पर्याप्त पानी होने के कारण प्यास बुझाने के लिए भालू, तेंदुआ से लेकर अन्य वन्य प्राणी पहुंचते हैं। सुरक्षा के लिहाज से पर्यटकों को समझाइश दी जाती है कि वह शाम ढलने से पहले इस जगह को छोड़ दें। वन्य प्राणी या हरियाली से कतई छेड़छाड़ न करें।