90 दिनों की मार्कशीट… साय सरकार पास या फेल? क्या सत्तापक्ष की निभाई गई गारंटियों से संतुष्ट है जनता
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
रायपुर। सरकार बनने के 3 महीने बाद और लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश की साय सरकार ने अपने कार्यकाल का हिसाब जनता को देते हुए पहले 3 महीनों में ही पूरी की गई मोदी की गारंटियों के बारे में ब्यौरा दिया है। सत्तापक्ष का दावा है कि सरकार ने कम वक्त में ही उम्मीद से ज्यादा और बेहतर काम किया है।


दावा किया है कि अगले 5 सालों में प्रदेश में ऐतिहासिक विकास होगा। विपक्ष इन दावों को खारिज कर रहा है। सरकार की 3 माह की रिपोर्ट को शून्य अंक दे रहा है। बड़ा सवाल है, किन-किन गारंटियों का लाभ वास्तव में जनता को मिलने लगा है, जनता क्या सोचती है, वो किस दावे पर मुहर लगाती है?


2023 में रिकॉर्ड सीटों के साथ छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने सत्ता में वापसी की। साय सरकार ने शपथ लेने के बाद से ही मोदी की गांरटी को पूरा करने पर काम शुरू कर दिया। साय सरकार ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर, अपने 3 माह के कार्यकाल के पूरा होने पर सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा जनता के सामने रखने की तैयारी कर ली है।

साय सरकार का दावा है कि 3 माह में साय सरकार ने उम्मीद से ज्यादा काम किया। 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत, धान किसानों को 2 साल का बकाया बोनस का 3700 करोड रुपए का भुगतान, प्रति एकड़ 21 क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी, 3100 रुपए के हिसाब से धान का भुगतान, PSC घोटाले की CBI जांच की घोषणा, महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं के खाते में पैसे डाले, कृषक उन्नति योजना के तहत 24 लाख से अधिक किसानों के खाते में धान के समर्थन मूल्य की अंतर की राशि 13000 करोड रुपए से अधिक का भुगतान, रामलला दर्शन योजना की शुरूआत की।
इधऱ, साय सरकार के 3 माह निभाए वादों को जनता से छलावा बताते हुए कांग्रेस सरकार को शून्य अंक दे रही है, जिसपर बीजेपी ने कटाक्ष किया कि छत्तीसगढ़ की जनता ने अब कांग्रेस को नंबर देने लायक ही नहीं छोड़ा है। वैसे, विपक्षी दल का सरकार को शून्य अंक देने से कहीं ज्यादा मायने ये रखता है कि प्रदेश की आम जनता साय सरकार के पहले 3 माह के कार्यकाल को कैसे आंकती है। क्या जनता सत्तापक्ष की निभाई गई गारंटियों से संतुष्ट है या फिर विपक्ष के छलावे के आरोपों के साथ है…?





