लोकसभा में इस बार हो सकती हैं दो महिला नेत्रियां आमने- सामने

 लोकसभा में इस बार हो सकती हैं दो महिला नेत्रियां आमने- सामने

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

 

भाजपा से सरोज पांडेय, तो कांग्रेस से ज्योत्सना महंत का नाम सबसे आगे

वर्ष 1984 से अब तक चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों में तीन को छोड़ कर शेष सभी बाहरी रहे।

सरोज के रहने के लिए मकान की भी व्यवस्था कर लिए जाने की खबर है।

 

 

कोरबा,, एक बार भाजपा कोरबा लोकसभा से पैराशूट प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य सरोज पांडेय टिकट दिए जाने की संभावना बढ़ गई है। इसके साथ ही लंबे समय से तैयारी कर रहे स्थानीय नेता स्तब्ध है। उधर कांग्रेस से एक बार फिर ज्योत्सना महंत को उतारा जाना लगभग तय है। यदि ऐसा हुआ तो इस बार कोरबा लोकसभा के रण में दो नेत्रियां आमने- सामने होंगी।

 

 

अविभाजित जांजगीर लोकसभा सीट से वर्ष 1984 से अब तक चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों में तीन को छोड़ कर शेष सभी बाहरी रहे। प्रभात मिश्रा, करूणा शुक्ला व मनहरण लाल पांडेय बिलासपुर व दिलीप सिंह जूदेव जशपुर के रहने वाले थे, पर चुनाव जांजगीर से लड़े और जीते भी। चंद्रपुर के रहने वाले भवानी लाल वर्मा व सारागांव के डा चरण दास महंत दो ही ऐसे नेता हैं, जो स्थानीय रहे। हालांकि परिसीमन के बाद कोरबा लोकसभा सीट अलग बनी और डा चरणदास महंत व वर्ष 2019 में चुनाव लड़ने वाली उनकी धर्मपत्नी ज्योत्सना महंत बाहरी हो गए। सामान्य सीट रही जांजगीर से वर्ष 2009 में कोरबा को अलग कर जांजगीर को आरक्षित कर दिया गया। वर्ष 1957 से लगातार पांच चुनाव 1974 तक जांजगीर सीट कांग्रेस के कब्जे में रहा।

 

वर्ष 1977 में पहली बार जनता पार्टी के मदन लाल शुक्ला चुनाव जीते। इसके बाद फिर वापस 1980 में कांग्रेस के प्रत्याशी रामगोपाल तिवारी के पाल में यह सीट आ गई। 1984 में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की। वर्ष 1989 में भाजपा ने यहां से दमदार नेता दिलीप सिंह जूदेव को उतारा और एक बार फिर यह सीट भाजपा के झोली में चली गई। एक बार फिर इस क्षेत्र से भाजपा ने बाहरी प्रत्याशी को उतारने का फैसला ले लिया है। किसी भी वक्त लोकसभा प्रत्याशियों की पहली सूची जारी हो सकती है। करीब एक साल पहले सरोज पांडेय कोरबा में सक्रिय हुई। यहां उन्होंने कुछ मौके पर दौरा भी किया। बताया यह भी जा रहा है कि उनके कुछ खास समर्थक कोरबा में पिछले एक सप्ताह से डेरा डाले हुए हैं। सरोज के रहने के लिए मकान की भी व्यवस्था कर लिए जाने की खबर है।

 

 

12.50 करोड़ के विकास कार्यो की दी स्वीकृति

 

राज्यसभा सदस्य सरोज पांडेय ने अपनी सांसद निधि से कोरबा लोकसभा क्षेत्र में 12.50 करोड़ रूपये के विकास कार्यो की स्वीकृति प्रदान की है। खास बात यह है कि यह स्वीकृति अभी आठ दिन के अंदर जारी की गई है। आचार संहिता भी लागू होने वाला है। इसलिए प्रशासन पर स्वीकृत किए गए कार्यों की शुरूआत करने काफी दबाव है। सरोज ने सांसद निधि की अपनी अब तक की सारी बकाया राशि कोरबा संसदीय क्षेत्र के लिए जारी कर दी है। कोरबा संसदीय क्षेत्र में कोरबा के अलावा मरवाही, पाली-तानाखार, कटघोरा, रामपुर, बैकुंठपुर, मनेन्द्रगढ़ और भरतपुर-सोनहट विधानसभा सीट आती है।

 

 

हारी सीट, इसलिए भाजपा का फोकस

 

कोरबा के स्थानीय भाजपा नेताओं में विकास महतो, जोगेश लांबा, देवेंद्र पांडेय, अशोक चावलानी, हितानंद अग्रवाल, डा राजीव सिंह, किशोर बुटोलिया, डा राकेश शर्मा, समेत एक दर्जन से अधिक दावेदार थे। कुछ नेताओं ने तो वाल पेटिंग भी शुरू कर दिया था। बाहरी प्रत्याशी दिए जाने से दावेदारों के मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा व बस्तर ये दोनों सीटें भाजपा पिछले चुनाव में हार गई थी, इसलिए पार्टी का इन दोनों सीटों पर अधिक फोकस है।