बांग्लादेश समेत भारत के शहरों में करता था नशीली दवाइयों सप्लाई ,
रिपोर्टर वीरेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट भिलाई दुर्ग से,
भिलाई डार्क वेब प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी करने वाले तस्कर को पुलिस ने राजस्थान के बूंदी जिले से गिरफ्तार किया है। पूर्व में मोहन नगर पुलिस ने शंकर नगर निवासी भाई बहन की गिरफ्तारी के बाद आरोपित का सुराग मिला था। आरोपित के कब्जे से पुलिस ने एक करोड़ 60 लाख 44 हजार रुपये की प्रतिबंधित नशीली दवाइयां जब्त की हैं। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वो भारत के अलावा बांग्लादेश में भी दवाइयों की सप्लाई करता था। आरोपित के पास से करीब पांच हजार पन्नों का एक रजिस्टर भी जब्त किया गया है। जिसमें उससे जुड़े और भी तस्करों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा के तहत कार्रवाई की है।

बांग्लादेश समेत भारत के शहरों में करता था नशीली दवाइयों की सप्लाई, तस्कर राजस्थान से गिरफ्तार, 1.60 करोड़ की दवाइयां जब्त
पत्रकार वार्ता में मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी राम गोपाल गर्ग ने बताया कि प्रतिबंधित नशीली दवाइयों के अंतरराष्ट्रीय तस्कर अंकुश पालीवाल (35) निवासी तिरुपति विहार देवपुरा जिला बूंदी राजस्थान को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित ने बूंदी राजस्थान में बायोलैब रेमेडीज नाम की एजेंसी खोल रखी थी और उसी के आड़ में प्रतिबंधित नशीली दवाइयों का कारोबार करता था। उसके पास से कुल एक करोड़ 60 लाख 44 हजार रुपये की प्रतिबंधित नशीली दवाइयां जब्त की गई थी। जिसमें 11 लाख 34 हजार नग एल्प्राजोलम टैबलेट, 46 हजार 80 नग ट्रामाडोल टैबलेट और 80 कार्टून में 9600 नग बायोकफ सिरप शामिल है।
बता दें कि मोहन नगर पुलिस ने पूर्व में शंकर नगर से आकांक्षा खंडेलवाल और उसके भाई वैभव खंडेलवाल को नशीली दवाइयां बेचते हुए गिरफ्तार किया था। इन्हीं आरोपितों से अंतरराष्ट्रीय तस्कर अंकुश पालीवाल के बारे में जानकारी मिली थी। जिसके आधार पर पुलिस की एक टीम राजस्थान गई थी और आरोपित को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

करीब तीन साल से चला रहा है तस्करी की चेन
गिरफ्तार आरोपित अंकुश पालीवाल करीब तीन साल से प्रतिबंधित नशीली दवाइयों का कारोबार कर रहा है। उसने डार्क वेब पर वायरस मेडिकोज नाम की प्रोफाइल बना रखी थी। उस पर संपर्क करने पर वो नशीली दवाइयों की सप्लाई करता था। वहीं इस कार्रवाई के पहले चरण में गिरफ्तार किए गए आकांक्षा खंडेलवार और वैभव खंडेलवाल ने छह महीने पहले ही वैभव फार्मास्टिकल नाम का फर्जी फर्म बनाकर ये धंधा शुरू किया था। वैभव खंडेलवाल आइटी इंजीनियर है। इसलिए उसे डार्क वेब की अच्छी खासी जानकारी है और उसने आरोपित अंकुश पालीवाल से संपर्क कर दुर्ग में कारोबार शुरू किया था।





