37 करोड़ की मड़वारानी एनीकट से 17 गांव की बुझेगी प्यास

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान, संपादक वीरेंद्र चौधरी
कोरबा- हसदेव नदी पर मड़वारानी एनीकट का निर्माण अब खनिज न्यास की जगह जल संसाधन करेगा। इससे क्षेत्र के 17 गांव में पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने जल संसाधन संचालनालय को निर्माण स्वीकृति के लिए पत्र लिखा है। 37 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली कार्य योजना तैयार कर शासन को भेज दिया है। सात साल पहले प्रस्तावित कार्य राशि आवंटन को स्वीकृति के अभाव में ठंडे बस्ते में चला गया था। नवगठित साय सरकार ने ग्रामीण विकास की लंबित योजनाओं में काम करना शुरू कर दिया है। जिसमें मड़वारानी एनीकट भी शामिल है। राशि मिलते ही कार्य शुरू हो होगा।
मड़वारानी पहाड़ के निकट तैयार होने वाले एनीकट निर्माण कार्य शुरू होने के आसार बढ़ गए हैं। बताना होगा कि मड़वारानी पहाड़ सहित आसपास के गांवों में जल आपूर्ति को सुलभ बनाने के लिए पूर्व सांसद स्वर्गीय बंशीलाल महतो ने अपने कार्यकाल के दौरान कार्य योजना तैयार कराई थी। यह कार्य जिला खनिज न्यास से पूरा होना था। तय समय पर राशि स्वीकृति नहीं होने से यह योजना अंतत: निरस्त हो गई। कांग्रेस सरकार ने भी अपने कार्यकाल में भाजपा प्रस्तावित योजना होने के कारण तवज्जो नहीं दी। अब जल संसाधन ने इसे विभागीय मद से पूरा कराने का निर्णय लिया है। जिसके लिए केबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने अनुमोदन किया है। तैयार प्राक्कलन के अनुसार 340 मीटर लंबा और 4.30 मीटर चौड़ा इस एनीकट की ऊंचाई 3.50 मीटर ऊंची होगी। पहाड़ के आसपास बसे ग्रामीण क्षेत्राें में भूमिगत जल कमजोर होने की वजह से नदी से जल आपूर्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही है। शहर के गेरवाघाट में सर्वेश्वर के बाद हसदेव नदी में तैयार होने वाला यह दूसरा बड़ा एनीकट होगा। बताना होगा कि सर्वेश्वर एनीकट का निर्माण निगम क्षेत्र के 23 वार्डों को पानी आपूर्ति के लिए किया गया है। नदी में दो एनीकट के अस्तित्व में आने से वर्षा जल का संरक्षण होगा।
पहाड़ के उपर मंदिर तक पहुंचेगा पानी
एनीकट निर्माण की जिम्मेदारी जल संसाधन की होगी। फिल्टर प्लांट से 17 गांव में पानी पहुंचाने के लिए प्राक्कलन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी ने पहले ही तैयार कर लिया है। योजना के तहत गांव में ही नहीं बल्कि पहाड़ के ऊपर भी पानी पहुंचाई जाएगी। जल आपूर्ति सुनिश्चित होने से मड़वारानी मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा होगी। पहाड़ के ऊपर जल पहुंचाने के लिए पिरामिड पद्धति से पानी संग्रहण टैंक बनाया जाएगा। इससे ऊपरी छोर तक पानी पहुंचाने में आसानी होगी।
कनकी से 22 किलोमीटर घट जाएगी चांपा की दूरी
एनीकट के अस्तित्व में आने से कनकी से चांपा की दूरी 22 किलोमीटर घट जाएगी। वर्तमान में मड़वारानी चांपा मार्ग पहुंचने के लिए लोगों को उरगा मार्ग से पहुंचना होता है। विभागीय अधिकारी की माने तो एनीकट से दो पहिया व चार पहिया वाहनों के आवागन की अनुमति होगी। सामान्य आवागन के लिहाज से एनीकट की ऊंचाई तय की गई है। खासबात यह है कि एनीकट कनकेश्वर धाम के निकट होगा इसलिए आसपास के ग्रामीणों को जलापूर्ति हो सकेगी। साथ ही निस्तारी की सुविधा भी उन्हे मिलेगी।
रूकेगी रेत की तस्करी, नदी कछार को मिलेगा बढ़ावा
एनीकट के अस्तित्व में आने से नदी में चल रहे अवैध रेतघाट बंद हो जाएगें। स्वीकृति नहीं होने के बाद भी भादा, तरदा व भैंसामुड़ा के आसपास खासी संख्या में अवैध रेतघाट का संचालन हो रहा है। प्रशासन को खनिज राजस्व की चपत लग रही है। साथ ही पर्यावरण नियमाें की भी अवहेलना हो रही है। एनीकट बनने से नदी में तीन किलोमीटर तक जल भराव रहेगा। इससे नदी कछार योजना के तहत तट से लगे आसपास के गांव के किसानाें को लाभ मिलेगा। उद्यानिकी और जिला कृषि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं से भी किसान जुड़ सकेंगे।
इन गांवाें में पहुंचेगा पानी
एनीकट निर्माण से जिन गांवों में पेय जल की सुविधा मिलेगी उनमें महोरा, देवलापाठ, बगधर, चिचोली, कछोरा, गितारी, बीर तराई, संडैल, भैंसामुड़ा, ढनढनी, जोगीपाली, कनकी, बैगपाली, भादा तरदा शामिल हैं।
मड़वारानी एनीकट निर्माण को मूर्त रूप देने के लिए प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा गया है। एनीकट के अस्तित्व में आने से 17 गांवों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चत होगी। साथ ही पहाड़ उपर पानी पहुंचाने में सहूलियत होगी। राशि आवंटन होते ही निविदा की पक्रिया शुरू की जाएगी।
एसएल द्विवेदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जल संसाधन





