अंबिकापुर शहर के नजदीक पहुंचा 33 हाथियों का दल, एनएच पर मची अफरा-तफरी, एसडीएम ने की स्कूलों की छुट्टी

आसिफ खान हेड ब्यूरो छत्तीसगढ़,
अंबिकापुर- पिछले चार दिनों से 33 हाथियों का दल अंबिकापुर शहर के करीब डेरा जमाए हुए है। मंगलवार की सुबह अंबिकापुर-रायगढ़ नेशनल हाइवे 43 पर दल आ गया। हाथियों के एनएच में आ जाने लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। कुछ देर के लिए एनएच पर आवागमन को रोकना पड़ा। इस दौरान कई लोग हाथियों का मोबाइल पर वीडियो बनाते रहे। इधर लुंड्रा एसडीएम ने हाथी प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों की छुट्टी करने के निर्देश जारी किए हैं। शाम से हाथियों का दल शहर के करीब 8-9 किमी दूर बांकी डेम के समीप डटा हुआ है।
33 हाथियों का दल अंबिकापुर के आसपास विचरण कर रहा था। हाथियों का यह दल लुण्ड्रा की ओर से अंबिकापुर के समीप पहुंच गया है। लालमाटी, बधियाचुआं, बांकी डेम के आस पास हाथियों का दल तीन से चार दिनों से विचरण कर रहा है।
मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे हाथी निचले खेतों से चढक़र अंबिकापुर-रायगढ़ नेशनल हाइवे-43 मार्ग में आ गए। इससे एनएच में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद हाथी बधियाचुआं से होते हुए बांकी डेम के समीप शाम तक डटे हुए थे। हाथियों की निगरानी वन अमले द्वारा दिन के साथ रात में भी की जा रही है।
ड्रोन के जरिए भी की जा रही निगरानी
डीएफओ ने बताया कि बलरामपुर-राजपुर रेंज से जिले में पहुंचा हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इस दल में लगभग 33 हाथी हैं। हाथियों के दल को लुण्ड्रा से वापस बलरामपुर अपने पारंपरिक मार्ग से जाना था। बीते शुक्रवार से हाथियों का दल लुण्ड्रा क्षेत्र में पहुंच। वन विभाग द्वारा 6 टीम गठित की गई है.
इनमें वन विभाग,पुलिस बल और हाथी मित्र शामिल है. वन विभाग द्वारा लगातार दिवाली की जा रही है साथ ही. सगन निगरानी हेतु ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. वर्तमान में मार्ग बाधित होने के कारण हाथियों का दल गझंडाड, लालमति, बस झाल और सुमेरपुर वन क्षेत्र में हाथियों का दल घूम रहा है।
प्रभावित क्षेत्र में दी गई स्कूलों की छुट्टी,
एसडीम ने बताया कि प्रवाहित क्षेत्र में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है पीवीटीजी सर्वे को भी रोकने का निर्देश दिया गया है। लोगों को सतर्क करते हुए जंगल की ओर न जाने की अपील की गई है।
वन विभाग द्वारा आम जनों को अपील की गई है कि हाथियों के दल का मार्ग बाधित न करें। शोर मचा कर, पास जाकर वीडियो बनाकर, पटाखे आदि फोड़कर हाथियों को ना छेड़ने की अथवा उनके मार्ग में बाधा ना बनने की अपील की गई है।





