गांजा तस्करी के आरोपी बर्खास्त GRP कॉन्स्टेबल पर ACB का शिकंजा: संतोष राठौर के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, मिली 16 लाख से अधिक की बेनामी संपत्ति

छत्तीसगढ़ राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान

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गांजा तस्करी के आरोपी बर्खास्त GRP कॉन्स्टेबल पर ACB का शिकंजा: संतोष राठौर के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, मिली 16 लाख से अधिक की बेनामी संपत्ति

बिलासपुर। बिलासपुर में ट्रेनों में गांजा तस्करी और तस्करों से सांठगांठ के मामले में जेल में बंद गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) के बर्खास्त आरक्षक संतोष राठौर की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जांच पूरी कर 5 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) के न्यायालय में अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश कर दिया है। जांच में बर्खास्त सिपाही के पास अपनी जायज आय से लगभग 35 प्रतिशत अधिक की काली कमाई का खुलासा हुआ है।

आय 46 लाख, संपत्ति मिली 62 लाख से अधिक

ACB द्वारा दस्तावेजों और सबूतों के वित्तीय विश्लेषण के बाद सामने आया कि अपनी पूरी सर्विस के दौरान संतोष राठौर की कुल वैध आय 46 लाख 08 हजार 341 रुपये थी। हालांकि, जांच में उसके पास से 62 लाख 28 हजार 137 रुपये की अचल व चल संपत्ति का ब्योरा मिला। इस तरह बर्खास्त आरक्षक ने पद का दुरुपयोग कर अपनी ज्ञात आय से 16 लाख 19 हजार 796 रुपये अधिक की संपत्ति अवैध रूप से बनाई।

तस्करों को छोड़कर खुद बेचने लगे थे गांजा, 1.50 करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

उल्लेखनीय है कि संतोष राठौर और उसके तीन अन्य साथी आरक्षक—मन्नू प्रजापति, सौरभ नागवंशी और लक्ष्मण गाइन—जीआरपी बिलासपुर की एंटी क्राइम यूनिट में तैनात थे। इन्हें ट्रेनों में अवैध मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी रोकने की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।

जांच में खुलासा हुआ कि चारों आरक्षक तस्करों को पकड़ने के बजाय उनसे जब्त गांजा खुद रख लेते थे और आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई न करने के बदले मोटी रकम वसूलते थे। जब्त गांजे को वे खुद बेचकर काली कमाई आपस में बांट लेते थे। इस मामले का खुलासा होने के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (रेल) ने 19 नवंबर 2024 को संतोष राठौर सहित चारों को बर्खास्त कर दिया था। वित्तीय जांच के दौरान पुलिस इनकी लगभग 1.50 करोड़ रुपये की लग्जरी मकान, कार और महंगी बाइक जैसी संपत्तियां जब्त कर सफेमा कोर्ट (मुंबई) भेज चुकी है।

फिलहाल जेल में बंद हैं चारों आरोपी

जीआरपी बिलासपुर में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) और 29 के तहत मामला दर्ज होने के बाद चारों बर्खास्त आरक्षकों को गिरफ्तार कर बिलासपुर जेल भेज दिया गया था। जहां तीन अन्य आरक्षक आपराधिक मामले का सामना कर रहे हैं, वहीं संतोष राठौर के खिलाफ अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (आय से अधिक संपत्ति) के तहत भी शिकंजा कस गया है।