रेलवे यार्ड में खड़े कोचों की सुरक्षा पर सख्ती: अब अंदर की कुंडी से लॉक करने पर रोक, स्वीकृत पैडलॉक का इस्तेमाल अनिवार्य
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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रेलवे यार्ड में खड़े कोचों की सुरक्षा पर सख्ती: अब अंदर की कुंडी से लॉक करने पर रोक, स्वीकृत पैडलॉक का इस्तेमाल अनिवार्य
नई दिल्ली:नांदेड़ डिवीजन के नांदेड़ यार्ड में खड़े एक डिब्बे में आग लगने की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी कोचिंग डिपो, यार्ड और स्टेब्लिंग लोकेशनों पर सुरक्षा उपाय बेहद कड़े कर दिए हैं। रेलवे बोर्ड की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि हादसे के समय खड़े कोच को स्वीकृत ताले (Approved Padlock) से सुरक्षित नहीं किया गया था और कर्मचारी इसे केवल अंदर की कुंडी से बंद कर रहे थे। रेलवे बोर्ड ने इस प्रथा को पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए कोचों की लॉकिंग प्रक्रिया पर सख्त रुख अपनाया है।
रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के अनुसार, यार्ड में खड़े किसी भी डिब्बे को सिर्फ अंदर की कुंडी से लॉक करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अब सभी स्टेबल किए गए कोचों को केवल निर्धारित और स्वीकृत पैडलॉक से ही सुरक्षित करना अनिवार्य होगा।
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम:
संयुक्त और औचक निरीक्षण: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सुरक्षा विभाग के अधिकारी नियमित रूप से यार्डों का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा निर्धारित संयुक्त प्रक्रिया आदेश (JPO) के अनुपालन की जांच के लिए औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) किए जाएंगे।
कर्मचारियों का प्रशिक्षण: सुपरवाइजर, शंटिंग स्टाफ, सफाईकर्मियों और तकनीशियनों को आग से बचाव के उपायों और सही लॉकिंग प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
तालों की उपलब्धता: सभी डिपो और यार्डों में काम करने योग्य स्वीकृत पैडलॉक की पर्याप्त उपलब्धता और उनके नियमित रखरखाव के निर्देश दिए गए हैं।
संस्थागत जवाबदेही: जांच के दौरान सुरक्षा या लॉकिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर तुरंत संस्थागत कार्रवाई की जाएगी।
RPF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि त्योहारी सीजन में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यार्डों की चेकिंग प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा ताकि कोई भी कोच बिना अप्रूव्ड लॉक के न रहे। निरीक्षण पूरा होने के बाद सभी मंडलों को मुख्यालय को एक समेकित रिपोर्ट (Compliance Report) सौंपनी होगी, जिसमें काउंसलिंग किए गए स्टाफ और सुधारी गई कमियों का ब्योरा शामिल होगा।





