मासूम से हैवानियत, फिर रंजिश निकालने पड़ोसी की कार में छिपाया शव: दुर्ग में 6 साल की भतीजी से दुष्कर्म और हत्या मामले में सगे चाचा को फांसी की सजा

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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मासूम से हैवानियत, फिर रंजिश निकालने पड़ोसी की कार में छिपाया शव: दुर्ग में 6 साल की भतीजी से दुष्कर्म और हत्या मामले में सगे चाचा को फांसी की सजा

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र में हुए दिल दहला देने वाले 6 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के बहुचर्चित मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट (POCSO Court) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी सगे चाचा (24 वर्ष) को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई है।

तमाम स्थानीय गवाहों के बयानों से मुकरने के बावजूद, पुलिस की मजबूत वैज्ञानिक जांच (DNA Matching) और SIT की पुख्ता सबूतों की बदौलत महज़ 17 महीनों के भीतर अदालत ने आरोपी को उसके अंजाम तक पहुँचा दिया।

घटना का सिलसिलेवार ब्योरा

कन्या पूजा के दौरान हैवानियत (6 अप्रैल 2025):

सुबह करीब 8 बजे मासूम बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर आयोजित ‘कन्या पूजा’ में शामिल होने आई थी। घर की महिलाएं पूजा और रसोई के काम में व्यस्त थीं। इसी दौरान आरोपी चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर मकान की छत पर बने एक अधूरे कमरे में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ यौन हिंसा (Sexual Assault) की, चीख दबाने के लिए उसका गला घोंटा और क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए शरीर को सिगरेट से दागा।

पुरानी रंजिश और पड़ोसी की कार का इस्तेमाल:

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी को लगा कि बच्ची मर चुकी है। उसने शव को ठिकाने लगाने और अपने पड़ोसी को फंसाने की साजिश रची, जिससे उसकी पुरानी रंजिश थी। आरोपी ने पड़ोसी की उस पुरानी कार की पिछली सीट के नीचे बच्ची के अचेत शरीर को छिपा दिया, जिसका एक दरवाजा लॉक नहीं होता था।

तपिश और ऑक्सीजन की कमी से थमीं सांसें:

पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, जब बच्ची को कार में रखा गया था तब उसकी सांसें चल रही थीं। लेकिन अप्रैल की भीषण गर्मी में बंद कार का तापमान अत्यधिक बढ़ जाने और ऑक्सीजन की कमी के कारण दम घुटने से उसकी मृत्यु हो गई। बंद कार की गर्मी से बच्ची के शरीर पर फफोले भी पड़ गए थे।

पुलिस को गुमराह करने का ड्रामा और गिरफ्तारी

3 घंटे तक परिजनों संग खोजबीन का नाटक:

बच्ची के गायब होने पर जब तलाश शुरू हुई, तो आरोपी खुद भी पुलिस और परिजनों के साथ मासूम को खोजने का नाटक करता रहा।

ऐसे पकड़ा गया आरोपी:

तलाश के दौरान आरोपी बार-बार उसी कार के पास जाता और उसे हाथ फेरकर देखता था। सिविल ड्रेस में तैनात क्राइम ब्रांच के जवानों ने उसकी इस अजीब गतिविधि को भांप लिया और संदेह के आधार पर उसे हिरासत में लिया।

कड़ाई से पूछताछ में कबूला जुर्म:

शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने के बाद, जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

घटना के बाद शहर में उपजा भारी जनाक्रोश

थाने का घेराव और तोड़फोड़:

वारदात के सामने आते ही उग्र भीड़ ने मोहन नगर थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया। शुरुआत में गलतफहमी के कारण भीड़ ने पड़ोसी (कार मालिक) के घर और कार में जमकर तोड़फोड़ की तथा आगजनी का प्रयास किया।

अधिवक्ताओं का पैरवी से इनकार:

दुर्ग अधिवक्ता संघ ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर फैसला लिया कि जिले का कोई भी वकील आरोपी का केस नहीं लड़ेगा। (हालांकि, विधिक प्रक्रिया के तहत उसे सरकारी कानूनी सहायता दी गई)।

अस्पताल में आरोपी से हाथापाई:

सुरक्षा कारणों से जब पुलिस आरोपी को सुपेला अस्पताल मेडिकल जांच के लिए ले गई, तो वहां मौजूद भीड़ और कर्मचारियों के गुस्से के कारण हाथापाई की स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने बामुश्किल उसे निकाला।

 

वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया था।

9 मई 2025: पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया।

26 मई 2025: आरोपी पर कोर्ट द्वारा आरोप तय किए गए।

11 जून 2025: गवाहों के बयान दर्ज होना शुरू हुए।

सुनवाई के दौरान यद्यपि कई स्थानीय गवाह अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन पुलिस द्वारा जुटाए गए साइंटिफिक एविडेंस केस की रीढ़ बने:

DNA रिपोर्ट: घटनास्थल और आरोपी के कपड़ों से मिले जैविक नमूनों का बच्ची के DNA से 100% मिलान हुआ।

मेडिकल व फॉरेंसिक साक्ष्य: बच्ची के शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान और दांतों के निशानों की वैज्ञानिक आधार पर पुष्टि हुई।

कोर्ट का अंतिम फैसला

विशेष पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश ने 2 सितंबर 2026 को इस मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 10 सितंबर 2026 को अदालत ने आरोपी चाचा को मासूम की हत्या और दुष्कर्म का दोषी पाते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई।

अब नियमानुसार इस फांसी की सजा पर उच्च न्यायालय (High Court) की पुष्टि की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।