अविवाहित भाई की मौत के बाद SBI खाते के लाखों रुपये पर हक का रास्ता साफ, छोटे भाई के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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अविवाहित भाई की मौत के बाद SBI खाते के लाखों रुपये पर हक का रास्ता साफ, छोटे भाई के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी

बिलासपुर: अविवाहित बड़े भाई के निधन के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बचत खाते में जमा लाखों रुपये की राशि को लेकर चले उत्तराधिकार मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बिलासपुर के प्रथम व्यवहार न्यायाधीश एवं वरिष्ठ श्रेणी के तृतीय अतिरिक्त न्यायाधीश संजू लता देवांगन की अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए मृतक के छोटे भाई मिलिंद डी. भिड़े को उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र (Succession Certificate) जारी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही बैंक में जमा 47 लाख रुपये से अधिक की राशि पाने का रास्ता साफ हो गया है।

माता-पिता का पहले ही हो चुका था निधन, खाते में नहीं था कोई नॉमिनी

मामले के अनुसार, दुर्ग (बोरसी) निवासी 64 वर्षीय मिलिंद डी. भिड़े ने अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि उनके सगे बड़े भाई विलास दिगंबर भिंडे की मृत्यु 31 मई 2024 को बिलासपुर के हेमूनगर में हो गई थी। वे जीवनभर अविवाहित रहे। उनके पिता दिगंबर वामन भिंडे का निधन 1961 और माता पुष्पजा भिंडे का निधन 1993 में ही हो चुका था।

मृतक का एसबीआई (तितली चौक, बिलासपुर शाखा) में बचत खाता था, जिसमें कोई नॉमिनी दर्ज नहीं था। आवेदक ने बताया कि उनके अलावा मृतक का कोई अन्य कानूनी वारिस नहीं है। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने मृत्यु प्रमाण-पत्र, बैंक पासबुक, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज पेश किए।

अदालत में बैंक ने दिया जवाब: 47.83 लाख रुपये जमा, भुगतान को तैयार

सुनवाई के दौरान एसबीआई की ओर से शाखा प्रबंधक आशीष कुमार गौतम ने शपथपत्र दाखिल कर अदालत को अवगत कराया कि उक्त खाता मृतक विलास दिगंबर भिंडे के नाम पर ही संचालित है। बैंक ने स्पष्ट किया कि खाते में वर्तमान में 47,83,908.62 रुपये जमा हैं और उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाने पर बैंक इस राशि का भुगतान करने के लिए तैयार है।

सार्वजनिक सूचना के बाद भी नहीं आई कोई आपत्ति

मामले की प्रक्रिया के तहत आम जनता को सूचित करने के लिए समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना का प्रकाशन कराया गया था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी भी व्यक्ति ने उपस्थित होकर इस राशि पर अपना दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं की।

अदालत का फैसला

न्यायालय ने प्रस्तुत दस्तावेजों, बैंक के जवाब और बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद पाया कि मृतक अविवाहित था और माता-पिता के निधन के बाद उसके भाई के अलावा अन्य कोई कानूनी वारिस नहीं है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 8 के तहत अदालत ने आवेदक मिलिंद डी. भिड़े को उत्तराधिकारी मानते हुए नियमानुसार कोर्ट फीस जमा करने के बाद ब्याज सहित पूरी जमा राशि प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी करने का आदेश जारी किया।