13 साल में 5 केस, लगातार विवादों में घिरा रवि निगम 1 साल के लिए जिला बदर; दुर्ग समेत 7 जिलों की सीमाओं में एंट्री पर बैन
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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13 साल में 5 केस, लगातार विवादों में घिरा रवि निगम 1 साल के लिए जिला बदर; दुर्ग समेत 7 जिलों की सीमाओं में एंट्री पर बैन
भिलाई/दुर्ग। लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने और सामाजिक-राजनीतिक विवादों में घिरे रहने वाले सुपेला थाने के लिस्टेड गुंडा-बदमाश रवि निगम (35 वर्ष) के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए जिला दंडाधिकारी ने रवि निगम को 1 वर्ष की अवधि के लिए जिला बदर कर दिया है। रावण भाठा, सुपेला निवासी रवि निगम को आदेश जारी होने के 1 सप्ताह के भीतर दुर्ग जिले की सीमा छोड़नी होगी।
छत्तीसगढ़ बजरंग दल के पूर्व भिलाई जिला अध्यक्ष रहे रवि निगम पर केवल दुर्ग ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों—राजनांदगांव, रायपुर, धमतरी, बालोद और बेमेतरा की सीमाओं में प्रवेश करने पर भी 1 साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। तय अवधि के दौरान बिना सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के वह इन जिलों में कदम नहीं रख सकेगा।
मारपीट, बलवा और धमकी: 13 सालों में दर्ज हुए 5 गंभीर मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रवि निगम के खिलाफ वर्ष 2013 से 2025 के दौरान सुपेला और पद्मनाभपुर थानों में 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं:
2013: मारपीट और जान से मारने की धमकी का पहला मामला दर्ज।
2018: गाली-गलौज, मारपीट, धमकी देने और घर के दरवाजे पर पत्थर मारकर नुकसान पहुंचाने तथा पड़ोसियों से हाथापाई का आरोप।
2023: सुपेला में दुकान बंद कराने के नाम पर जबरन गुंडागर्दी। रवि निगम और उसके साथियों पर दुकान के सामान को डंडों से तोड़ने और व्यापारी को घेरकर धमकाने का केस।
2023 (दूसरा मामला): मारपीट, बलवा और सार्वजनिक/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं के तहत मामला।
2025: पद्मनाभपुर थाने में डराने-धमकाने और मारपीट के तहत अपराध दर्ज।
पुलिस रिपोर्ट: “रोकने और समझाने का भी नहीं हुआ कोई असर”
पुलिस प्रशासन ने रवि निगम का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और पुराने प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों के दस्तावेज जिला दंडाधिकारी के समक्ष पेश किए। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी द्वारा भीड़ जुटाकर अशांति फैलाने, आम लोगों को डराने-धमकाने और मारपीट करने की आदत बन चुकी थी।
प्रशासन ने सुनवाई के दौरान माना कि पूर्व में की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों का आरोपी पर कोई असर नहीं हुआ। क्षेत्र की कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम जनता की सुरक्षा के हित में यह सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
संगठनों से निष्कासन और ऑडियो कांड तक, हमेशा घिरा रहा विवादों में
रवि निगम का नाम केवल पुलिस फाइलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक व सामाजिक संगठनों में भी वह लगातार विवादों का केंद्र बना रहा:
विहिप-बजरंग दल से निष्कासन: 17 जनवरी 2022 को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने उसे संगठन से बाहर कर दिया था।
चर्च से अवैध वसूली का आरोप (अप्रैल 2026): इसके बाद वह छत्तीसगढ़ बजरंग दल से जुड़ा और भिलाई जिला अध्यक्ष बना। हालांकि, अप्रैल 2026 में चर्च से पैसे मांगने का कथित ऑडियो वायरल होने के बाद उसे छत्तीसगढ़ बजरंग दल के सभी पदों से हटा दिया गया।
भाजयुमो कार्यकारिणी विवाद (अप्रैल 2026): अप्रैल 2026 में ही रवि निगम का नाम भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की जिला कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के रूप में सामने आया। इसका भारी विरोध होने के बाद पूरी सूची अमान्य कर दी गई और बिना उसके नाम के नई सूची जारी करनी पड़ी।
लगातार सामने आ रही आपराधिक गतिविधियों और शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।





