छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का सख्त रुख: बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के नहीं चलेंगी यात्री बसें, परिवहन विभाग को मोटर व्हीकल एक्ट का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का सख्त रुख: बिना लाइसेंसधारी कंडक्टर के नहीं चलेंगी यात्री बसें, परिवहन विभाग को मोटर व्हीकल एक्ट का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश में यात्री बसों और स्टेज कैरिज वाहनों के संचालन में लाइसेंसधारी कंडक्टर की अनिवार्यता को लेकर परिवहन विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया है कि यदि कोई भी यात्री बस बिना लाइसेंसधारी परिचालक (कंडक्टर) के सड़कों पर दौड़ती पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारी कानून के अनुसार बिना किसी ढील के सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

याचिकाकर्ता का दावा: 68 हजार से अधिक बसें, पर लाइसेंसधारी कंडक्टर 1,000 से भी कम

यह याचिका याचिकाकर्ता विनेश कुमार चोपड़ा की ओर से दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने परिवहन विभाग के सचिव, परिवहन आयुक्त और विभिन्न जिलों के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को पक्षकार बनाया था। याचिका में दावा किया गया था कि प्रदेश भर में बड़ी संख्या में यात्री बसें बिना किसी वैध लाइसेंसधारी कंडक्टर के धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रदेश में कुल 68,369 पंजीकृत यात्री बसें हैं, जबकि उनके मुकाबले लाइसेंसधारी कंडक्टरों की संख्या 1,000 से भी कम है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर विषय है।

राज्य सरकार ने कोर्ट में दिया आंकड़ों का हिसाब

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए वास्तविक आंकड़े अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। सरकार ने बताया कि:

24 जनवरी 2025 तक का आंकड़ा: प्रदेश में 14,488 पंजीकृत यात्री बसें और 7,236 स्कूल बसें संचालित हैं, जिससे कुल वाहनों की संख्या 21,724 होती है।

लाइसेंसधारी कंडक्टरों की संख्या: राज्य में वर्तमान में कुल 1,012 लाइसेंसधारी कंडक्टर पंजीकृत हैं।

विभाग की कार्रवाई: शासन ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि परिवहन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर बिना लाइसेंसधारी कंडक्टरों के संचालित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के दिशा-निर्देश जारी करता रहा है।

बिना लाइसेंस संचालन पर वसूला गया करोड़ों का जुर्माना

राज्य शासन ने अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में बीते महीनों में की गई दंडात्मक कार्रवाई का ब्योरा भी साझा किया:

जनवरी 2025 की कार्रवाई: विभिन्न चेकपोस्टों पर बिना वैध कंडक्टर के चल रही 165 यात्री बसों पर शिकंजा कसा गया और उनसे 1,67,600 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

विशेष चेकिंग अभियान (अप्रैल 2024 से फरवरी 2025): बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे 1,61,377 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 19 करोड़ 77 लाख 2 हजार 700 रुपये का जुर्माना वसूला गया है।

हाई कोर्ट का अंतिम फैसला: नियमों का सख्ती से हो पालन

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाई गई चिंता पूरी तरह से निराधार नहीं है और यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में भी है। जनहित याचिका का निराकरण करते हुए अदालत ने परिवहन विभाग को स्पष्ट आदेश दिया:

“परिवहन अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और छत्तीसगढ़ मोटर वाहन नियम, 1994 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराएं। कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी बस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।”

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पंजीकृत बसों और लाइसेंसधारी कंडक्टरों के आंकड़ों को लेकर याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावों की सत्यता पर कोर्ट ने अपनी ओर से कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है।