रक्षाबंधन पर गहराया मातम: बहन की अस्थियां विसर्जित करने महादेव घाट पहुंचे भाई की खारुन नदी में डूबने से मौत, SDRF की देरी पर फूटा गुस्सा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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रक्षाबंधन पर गहराया मातम: बहन की अस्थियां विसर्जित करने महादेव घाट पहुंचे भाई की खारुन नदी में डूबने से मौत, SDRF की देरी पर फूटा गुस्सा
रायपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन जहां शहर भर में खुशियों के साथ मनाया जा रहा था, वहीं रायपुर के एक परिवार के लिए यह दिन ताउम्र न भूलने वाले गहरे सदमे और मातम में बदल गया। अपनी दिवंगत बहन की अस्थियों को खारुन नदी में विसर्जित करने पहुंचे भाई की नदी के तेज बहाव में बह जाने से मौत हो गई। रायपुरा के सतनामीपारा निवासी युधिष्ठिर सारंग का देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिल सका था। शनिवार सुबह SDRF की टीम एक बार फिर नदी में युधिष्ठिर की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाएगी।

अस्थि विसर्जन के बाद नहाने उतरा था युधिष्ठिर, गहराइयों में खोया
डीडी नगर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, युधिष्ठिर शुक्रवार दोपहर अपने परिवार के साथ महादेव घाट पहुंचा था। परिजनों ने नम आंखों से पहले उसकी बहन की अस्थियों को नदी में विसर्जित किया। इसके बाद युधिष्ठिर नदी में नहाने के लिए उतरा। खारुन नदी में पानी का बहाव बेहद तेज था और युधिष्ठिर को गहराई का अंदाजा नहीं लग सका। पानी के बीच पहुंचते ही उसका संतुलन बिगड़ गया और वह तेज धारा की चपेट में आ गया।
बचाने कूदा युवक भी डूबा, मछुआरों ने जान पर खेलकर निकाला बाहर
तेज बहाव में बहते हुए युधिष्ठिर ने खुद को संभालने और किनारे तक पहुंचने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन उफनती धारा उसे खींचती चली गई। सांस फूलने और पानी के भारी दबाव के कारण वह खुद को बाहर नहीं निकाल सका। किनारे खड़े एक युवक ने जब युधिष्ठिर को डूबते देखा, तो उसने बिना सोचे-समझे नदी में छलांग लगा दी। हालांकि, पानी का वेग इतना ज्यादा था कि वह युवक भी डूबने लगा। गनीमत रही कि पास मौजूद मछुआरों ने तत्परता दिखाते हुए किसी तरह उस युवक को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन युधिष्ठिर पानी के आगोश में समा गया।
SDRF की लेटलतीफी से परिजनों में भारी आक्रोश, रात होने तक जारी रहा रेस्क्यू
हादसे की सूचना मिलते ही डीडी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, एसडीआरएफ (SDRF) की रेस्क्यू टीम की देरी को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। स्वजनों का सीधा आरोप है कि घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची। अगर महादेव घाट पर पहले से बचाव दल तैनात होता या टीम समय पर माना से पहुंच जाती, तो युधिष्ठिर की जान बचाई जा सकती थी। देर शाम तक चले रेस्क्यू के बावजूद युवक का पता नहीं चल सका, जिसके बाद शनिवार सुबह से दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया गया है।





