पाक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग को देह व्यापार में धकेलने वाले 5 दोषियों को आखिरी सांस तक जेल, 1 बरी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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पाक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग को देह व्यापार में धकेलने वाले 5 दोषियों को आखिरी सांस तक जेल, 1 बरी
राजनांदगांव। नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अगवा करने, हफ्तों तक बंधक बनाकर देह व्यापार कराने और बेचने की साजिश रचने के गंभीर मामले में राजनांदगांव के विशेष पाक्सो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की मुख्य सूत्रधार साधना वैष्णव उर्फ संध्या और मुस्कान गोस्वामी समेत कुल पांच दोषियों को जीवनकाल (आखरी सांस) तक कारावास की कठोर सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में किशोरी के प्रेमी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की कि यौन हिंसा की शिकार पीड़िता को केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि ताउम्र मानसिक आघात झेलना पड़ता है। ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों के प्रति किसी भी तरह की अनावश्यक सहानुभूति या उदारता दिखाना पूरी तरह अनुचित है।
आधार लिंक कराने निकली थी पीड़िता, बस में जाल में फंसाया
विशेष लोक अभियोजक प्रिया कांकरिया के अनुसार, घटना फरवरी 2024 की है। पीड़िता अपने बैंक खाते में आधार लिंक कराने के सिलसिले में घर से निकली थी। रायपुर जाते वक्त बस में उसकी मुलाकात साधना वैष्णव से हुई। साधना ने झांसा देकर उसे अपने घर रायपुर बुला लिया, जहां उसकी साथी मुस्कान गोस्वामी भी रहती थी।
जब किशोरी ने अपने घर लौटने की जिद की, तो दोनों महिलाओं ने उसे बंधक बना लिया। इसके बाद पैसों का लालच और दबाव बनाकर अलग-अलग युवकों से उसका जबरन दुष्कर्म कराया गया। बाद में उसे रायगढ़ के बाजीनपाली ले जाकर भी देह व्यापार में धकेला गया। पुलिस जांच में यह खौफनाक खुलासा भी हुआ कि आरोपी पीड़िता को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की फिराक में थे।
पिता की शिकायत पर छुरिया थाना पुलिस ने तकनीकी जांच की मदद से 27 फरवरी 2024 को पीड़िता को रायगढ़ से साधना के कब्जे से सकुशल बरामद किया था।
दोषियों और धाराओं का ब्योरा
साधना वैष्णव व मुस्कान गोस्वामी: धारा 376-घ/109 (सामूहिक दुष्कर्म के लिए उकसाना) के तहत प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास और पाक्सो एक्ट की धारा 6/17 के तहत 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास।
चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर व धनंजय धृतलहरे: सामूहिक दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में जीवनकाल तक कठोर कारावास।
गोपीराम कोल (प्रेमी): अपराध सिद्ध न होने पर अदालत ने बरी किया।





