चित्रकूट-सतना फोरलेन: वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनेंगे 38 एनिमल पैसेज, वन विभाग ने NHAI को सौंपा खाका

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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चित्रकूट-सतना फोरलेन: वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनेंगे 38 एनिमल पैसेज, वन विभाग ने NHAI को सौंपा खाका

सतना। चित्रकूट–मझगवां–सतना फोरलेन सड़क परियोजना के निर्माण के साथ-साथ अब जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का पुख्ता खाका तैयार किया जा रहा है। करीब 1,653.12 करोड़ रुपये की लागत से मौजूदा दो-लेन सड़क को फोरलेन में बदला जाना है। चौड़ी सड़क और तेज रफ्तार यातायात से वन्यजीवों के स्वतंत्र आवागमन में बाधा तथा सड़क दुर्घटनाओं के खतरे को देखते हुए वन विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के समक्ष 38 स्थानों पर वन्यजीव-पारगमन संरचनाएं (अंडरपास, ओवरपास या वायाडक्ट) बनाने की मांग रखी है।

चित्रकूट और मझगवां रेंज में चिन्हित बिंदु

वन विभाग द्वारा चिन्हित किए गए 38 संवेदनशील बिंदुओं में सर्वाधिक 25 क्रॉसिंग पॉइंट चित्रकूट वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जबकि 13 क्रॉसिंग पॉइंट मझगवां रेंज में हैं।

चित्रकूट रेंज: रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार, वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए डब्ल्यूआईआई (WII) गाइडलाइन के तहत 25 स्थानों पर पारगमन संरचनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

मझगवां रेंज: रेंजर रंजन सिंह परिहार ने बताया कि विभाग ने 13 जीपीएस (GPS) लोकेशन हाईवे परियोजना की रूपरेखा में शामिल करने का सुझाव दिया है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की गाइडलाइन का हवाला

वन विभाग ने देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान की “इको-फ्रेंडली मेजर्स टू मिटिगेट इम्पेक्ट ऑफ लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर ऑन वाइल्डलाइफ” गाइडलाइन का हवाला दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हाईवे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए स्थायी दीवार न बने। गाइडलाइन के मुख्य सिद्धांत:

स्मार्ट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास के साथ प्राकृतिक आवास और corridors का नेटवर्क प्रभावित न हो।

तीन-स्तरीय नीति: पहले वन्यजीवों पर प्रभाव से बचना, फिर प्रभाव को न्यूनतम करना और अंत में क्षतिग्रस्त क्षेत्र को बहाल करना।

पारंपरिक मार्गों का संरक्षण: बाघ, तेंदुआ, हिरण आदि के पारंपरिक रास्तों पर एनिमल पैसेज देना।

सुरक्षा के लिए प्रस्तावित प्रमुख उपाय

संरचनात्मक उपाय: आवश्यकतानुसार अंडरपास, ओवरपास/वाइल्डलाइफ ब्रिज, एलिवेटेड कॉरिडोर (वायाडक्ट), टनल तथा कलवर्ट।

दिशा-निर्देशन: गाइडिंग फेंसिंग, ताकि वन्यजीव सड़क पर सीधे न आकर तय क्रॉसिंग की ओर जाएं।

गति नियंत्रण: चालकों को सचेत करने के लिए स्पीड बैरियर और चेतावनी साइन बोर्ड।

वैज्ञानिक आंकलन के आधार पर जल्द ही इन 38 चिन्हित स्थानों पर उपयुक्त संरचनाओं के प्रकार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।